बारूद पर बैठा मध्यप्रदेश! 2 साल में 4 धमाके, जिम्मेदार कौन?
Madhya Pradesh Sitting on a Powder Keg! Four Explosions in Two Years — Who Is Responsible?

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल/देवास। मध्यप्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों में लगातार हो रहे विस्फोटों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। शिवपुरी, हरदा, मुरैना और अब देवास में हुए भीषण हादसों के बाद नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंच ने देवास हादसे की जांच के लिए गठित आयोग के समक्ष याचिका दायर कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
दो साल में चार बड़े ब्लास्ट, फिर भी नहीं टूटी लापरवाही की नींद
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों में चार बड़े हादसे हो चुके हैं। हर बार जांच, कार्रवाई और सुरक्षा सुधार के दावे किए गए, लेकिन जमीन पर हालात नहीं बदले।
देवास हादसा इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी आज भी जारी है।
जांच आयोग के सामने पहुंची याचिका
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने देवास हादसे की जांच कर रहे आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े के समक्ष याचिका प्रस्तुत की है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते बार-बार ऐसे हादसे हो रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी क्षेत्र में न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का पालन नहीं हुआ है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना और आपराधिक कार्रवाई की जाए।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 12 मई को एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन उसके महज दो दिन बाद 14 मई को देवास में बड़ा हादसा हो गया।
हरदा की तर्ज पर मुआवजा देने की मांग
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रभात यादव ने आयोग से मांग की है कि हरदा पटाखा फैक्ट्री हादसे की तरह देवास के पीड़ितों को भी पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
साथ ही पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि और पब्लिक लाइबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट के तहत मिलने वाली राहत भी प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जाए।
बार-बार हादसे, लेकिन जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर बड़े हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, तो फिर कुछ ही महीनों बाद नया विस्फोट कैसे हो जाता है?
क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? और यदि नहीं, तो उनकी जवाबदेही कब तय होगी?
बड़ा सवाल
शिवपुरी, हरदा, मुरैना और देवास… आखिर कितनी जानें जाने के बाद पटाखा फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार और प्रशासन गंभीर होगा?