MP में धीरौली की हरी छाया पर अडानी का काला साया. केंद्र सरकार पर कांग्रेस का आरोप.
Adani’s Dark Shadow Over Dheeroli’s Green Canopy in MP: Congress Accuses Central Government.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
In MP’s Dheeroli, Adani has allegedly begun cutting trees on government and forest land without legal approvals, violating FRA 2006 and PESA 1996. Congress claims central government imposed allocations, ignoring tribal rights and Gram Sabha consent, threatening local communities’ livelihoods and the environment.
MP संवाद, भोपाल, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 12 सितंबर, 2025 को आरोप लगाया कि अडानी समूह ने मध्य प्रदेश के धीरौली में कोयला खदान परियोजना के लिए वन अधिकार अधिनियम (FRA) और अन्य क़ानूनों का घोर उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा कि अडानी ने सरकारी और वन भूमि पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है, जबकि स्टेज-II वन मंजूरी और ग्राम सभा की सहमति अभी तक नहीं मिली।
सरकार की मिलीभगत का आरोप
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि 2019 में केंद्र सरकार ने इस आवंटन को थोप दिया था, और अब 2025 में बिना कानूनी मंजूरी के इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर अडानी समूह और केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
आदिवासी समुदाय पर दोहरा संकट
जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में आने वाली खदान परियोजना आदिवासी अधिकार और स्वशासन के संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
परियोजना से महुआ, तेंदू, जड़ी-बूटियाँ और ईंधन की लकड़ी गायब हो जाएगी, जिससे आदिवासी समुदाय की आजीविका और पवित्रता पर गंभीर असर पड़ेगा।
ग्राम सभा की अनदेखी और दोहरा विस्थापन
रमेश ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा से कोई परामर्श नहीं लिया गया, जबकि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम सभाओं की सहमति अनिवार्य है।
उन्होंने इसे दोहरा विस्थापन करार दिया, क्योंकि पहले भी परियोजनाओं के कारण कई परिवार उजड़े थे।
अडानी की खदान परियोजना को कोयला मंत्रालय से मिली मंजूरी
इस महीने की शुरुआत में अडानी पावर ने घोषणा की कि धीरौली खदान में खनन कार्य शुरू करने के लिए कोयला मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है।
लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पर्यावरण और वन मंत्रालय की चरण-2 मंजूरी अब तक नहीं मिली, जबकि अडानी ने पहले ही वनों की कटाई शुरू कर दी।
संक्षेप में
- अडानी समूह ने धीरौली में वन भूमि पर पेड़ों की कटाई शुरू की।
- कानून और ग्राम सभा की सहमति की अनदेखी की गई।
- आदिवासी समुदाय की आजिविका और पारिस्थितिक संतुलन खतरे में।
- कांग्रेस नेताओं ने मोदीनी सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाया।