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MP बजट 2025: क्या युवाओं, किसानों और महिलाओं को मिलेगा हक?

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MP Budget 2025 brings major financial decisions, including road development, irrigation projects, education reforms, and women’s empowerment initiatives—Know the key takeaways!

Madhya Pradesh Budget 2025-26: Highlights of financial allocations, government schemes, and economic policies for growth and development.

MP Budget 2025: Focus on youth, farmers, women, and infrastructure—A step towards a stronger economy

MP Budget 2025: Will Youth, Farmers, and Women Get Their Rights?

Rajneesh Kumar Kaurav,Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.

Madhya Pradesh Budget 2025-26 is the biggest ever at ₹4.21 lakh crore. The government claims it is development-focused, but opposition criticizes it as unrealistic and anti-farmer. Key highlights include roads, ITIs, irrigation, and women’s welfare. Critics argue it ignores inflation, unemployment, and rural needs. Will it bring real change?

नरसिंहपुर: मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश किया गया ₹4,21,032 करोड़ का बजट राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत इस बजट को सरकार ने विकासोन्मुखी बताया है, जिसमें गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के उत्थान पर विशेष ध्यान दिया गया है। हालाँकि, विपक्ष और स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट बड़े वादों का पुलिंदा है, जिसमें जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज किया गया है


बजट की मुख्य विशेषताएँ:

कोई नया कर नहीं लगाया गया, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी।
3500 किमी नई सड़कें, 70 नए पुल और 5 वर्षों में 1 लाख किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य।
22 नए ITI संस्थान और हर विधानसभा क्षेत्र में एक स्टेडियम का प्रस्ताव।
महिलाओं और गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
19 सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹17,863 करोड़ का प्रावधान
जल जीवन मिशन के लिए ₹17,135 करोड़ आवंटित
औद्योगिक विकास के लिए 39 औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने की योजना

सरकार के अनुसार, यह बजट “सर्वहितैषी और सर्वस्पर्शी” है, जो सभी वर्गों को लाभ पहुंचाएगा।

क्या यह बजट किसानों के लिए फायदेमंद है?

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बजट को “किसान विरोधी” करार दिया है। तेंदूखेड़ा के किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का फैसला अच्छा है, लेकिन लागत और बाजार की अनिश्चितता को दूर करने की कोई ठोस योजना नहीं दी गई है।

गेहूं के समर्थन मूल्य को ₹2700 प्रति क्विंटल करने का वादा अधूरा रह गया है, जिससे किसानों में असंतोष है।

पूर्व विधायक संजय शर्मा ने बजट को “खोखला” बताते हुए कहा कि इसमें ग्रामीण इलाकों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार कृषि क्षेत्र की अनदेखी कर रही है, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।


विकास कार्यों पर कितना फोकस?

सरकार का दावा है कि यह बजट ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आधारभूत संरचना के विकास को गति देगा

सड़क और सिंचाई परियोजनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेंगी
डिजिटल यूनिवर्सिटी और रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना से शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे।
पुराने ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और आदिवासी कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि घोषणाएँ बड़ी हैं, लेकिन उनकी जमीनी क्रियान्वयन क्षमता सवालों के घेरे में है

विपक्ष के आरोप और जनता की राय

? पूर्व विधायक संजय शर्मा ने कहा कि यह बजट केवल लुभावने वादे करता है, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई जैसे प्रमुख मुद्दों पर कोई ठोस उपाय नहीं है
? कृषि क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान नाकाफी माने जा रहे हैं। धान और अरहर-चना के दाम को लेकर सरकार ने कोई समाधान नहीं दिया।
? लाड़ली बहना योजना के तहत पेंशन का वादा विपक्ष द्वारा छलावा करार दिया गया है।


बजट 2025-26: उम्मीदें बनाम हकीकत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावा किया है कि अगले 5 वर्षों में मध्यप्रदेश का बजट दोगुना होगा। लेकिन यह बजट तेंदूखेड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में कितना प्रभावी होगा, यह देखना बाकी है।

? बजट कागजों पर भव्य जरूर दिखता है, लेकिन क्या यह वादों से आगे बढ़कर हकीकत में बदलेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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