MP SAMVAAD LOGO 2

दो साल से झोपड़ी में ‘स्कूल’! जर्जर भवन ने बच्चों की पढ़ाई को बनाया मजबूरी.

0

Two Years in a Hut as a ‘School’! Dilapidated Building Forces Children to Study in Difficult Conditions.

Special Correspondent, Mandla, MP Samwad News

MP संवाद समाचार, मंडला/भोपाल। मंडला। जिले के विकासखंड घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघनपुरी के खेरमाई मोहल्ला स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय (डाइस कोड-23420602701) की बदहाल स्थिति ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय का मूल भवन जर्जर होने के बाद पिछले करीब दो वर्षों से कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई एक निजी झोपड़ीनुमा कच्चे मकान में संचालित होने की जानकारी सामने आई है।

एक ओर सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर यहां छोटे से कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाने की मजबूरी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है।

एक कमरे में पांच कक्षाएं, कैसे होगी गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई?

ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर निजी कच्चे मकान में स्कूल संचालित किया जा रहा है। सीमित जगह होने के कारण कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को एक ही छोटे कमरे में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाया जाएगा, तो बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक वातावरण और व्यक्तिगत ध्यान कैसे मिल पाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बनी इस स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त स्कूल भवन उनका अधिकार है। ऐसे में दो वर्षों से वैकल्पिक व्यवस्था में चल रहे विद्यालय की स्थिति सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

10.61 लाख रुपये मंजूर, फिर भी बच्चों को पक्की छत का इंतजार

विभागीय जानकारी के अनुसार, विद्यालय के नए भवन निर्माण के लिए करीब 10.61 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। बताया गया है कि निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है और जल्द ही भवन निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है, तो बच्चों को स्थायी भवन कब मिलेगा? टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण शुरू होने में कितना समय लगेगा? क्या तब तक बच्चों को इसी अस्थायी और सीमित व्यवस्था में पढ़ाई करनी होगी?

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन निर्माण प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा कराए, ताकि बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित और उचित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

‘स्कूल भवन’ का इंतजार कब खत्म होगा? प्रशासन से ग्रामीणों की सीधी मांग

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण नए विद्यालय भवन का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। 10.61 लाख रुपये की स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य कब शुरू होता है और बच्चों को नए भवन की सुविधा कब मिलती है, यही इस पूरे मामले की असली परीक्षा होगी।

सरकारी स्कूल के बच्चों को भी वही सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए, जिसकी उम्मीद शहरों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से की जाती है। सवाल सिर्फ एक भवन का नहीं, बल्कि उन बच्चों के भविष्य का है, जो पिछले दो वर्षों से एक अस्थायी व्यवस्था में पढ़ने को मजबूर बताए जा रहे हैं।

Legal Disclaimer

This report is based on available information and local claims; allegations remain unverified unless confirmed through official inquiry or competent authority findings.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.