किसने बदला चावल का रास्ता? 29 ट्रकों की आवाजाही ने खोली सप्लाई चेन की पोल.
Who Diverted the Rice Route? Movement of 29 Trucks Exposes the Supply Chain’s Dark Secrets.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित सरकारी चावल की कथित हेराफेरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए सवाल सामने आ रहे हैं। अब जांच के केंद्र में गोंदिया जिले की खंडेलवाल राइस मिल पहुंचा फोर्टिफाइड चावल, 29 ट्रकों की आवाजाही, वर्ष 2025-26 की कस्टम मिलिंग के चावल और सरकारी एजेंसियों की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, खंडेलवाल बंधुओं की राइस मिल में 29 ट्रकों के जरिए फोर्टिफाइड चावल पहुंचने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि मिल संचालक जुगल किशोर खंडेलवाल ने चावल के सैंपल की जांच के बाद ट्रकों को खाली करने के निर्देश दिए थे।
यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया चावल राइस मिल तक कैसे पहुंचा और उसे मिल में उतारने से पहले उसकी गुणवत्ता जांचने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
यह पूरा मामला अब केवल चावल की कथित हेराफेरी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि सरकारी खरीद, कस्टम मिलिंग, एफसीआई सप्लाई, परिवहन और एथेनॉल प्लांट तक चावल पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
29 ट्रकों से पहुंचा फोर्टिफाइड चावल? ‘सैंपल जांच’ के बाद खाली हुई मिल—अब सवालों के घेरे में पूरा नेटवर्क
जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, खंडेलवाल राइस मिल में 29 ट्रकों के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल पहुंचने की बात सामने आई है। कुछ लोगों के बयान भी जांच टीम द्वारा दर्ज किए जाने की जानकारी है, जिनमें सीडब्ल्यूसी गोदाम गड़े से चावल भरकर खंडेलवाल राइस मिल तक पहुंचाने की बात कही गई है।
पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयानों में प्रवेश कुमार डायरे, विकास कुथे, चिरंजीव, सौरभ उर्फ गोल्डी, राजा उर्फ हंसराज, नीलेश डायरे, मोहित आमाडारे, विक्की उर्फ मयूर डुंभरे और बंटी उर्फ निकेश सहित अन्य लोगों से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।
अब जांच का अहम बिंदु यह है कि यदि चावल एथेनॉल प्लांट के लिए निर्धारित था, तो वह गोंदिया स्थित राइस मिल तक कैसे पहुंचा? क्या परिवहन दस्तावेजों में भी यही गंतव्य दर्ज था या रास्ते में खेप का कथित रूप से डायवर्जन किया गया?
इन सवालों के जवाब ही यह तय करेंगे कि मामला केवल परिवहन स्तर की गड़बड़ी था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
2025-26 की कस्टम मिलिंग के बोरे मिले तो उठे सवाल—नया चावल एथेनॉल प्लांट तक कैसे पहुंचा?
जांच के दौरान संचेती राइस मिल, वारासिवनी से करीब 2,000 खाली बोरे जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कुछ बोरों पर वर्ष 2025-26 की कस्टम मिलिंग से संबंधित एफसीआई स्टेंसिल पाए जाने की बात कही जा रही है।
बताया गया है कि इन बोरों का संबंध अंबिका राइस इंडस्ट्रीज, अंबिका एग्रो, जानकी राइस मिल और गंगा इंडस्ट्रीज सहित कुछ अन्य मिलों से होने की जांच की जा रही है।
वहीं, अंबिका राइस मिल के संचालक विनोद राहंगडाले के कथित बयान के अनुसार, उनकी मिल में तैयार चावल केवल सरकारी संस्थाओं में जमा किया जाता है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल है कि यदि 2025-26 की कस्टम मिलिंग से जुड़े बोरे दूसरी जगह मिले, तो उनकी वास्तविक आवाजाही क्या थी और वे किस खेप के साथ जुड़े थे?
यहां एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि किसी बोरे पर एफसीआई स्टेंसिल पाए जाना अपने आप में अवैधता का प्रमाण नहीं है। इसकी वास्तविक स्थिति परिवहन रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, डिस्पैच दस्तावेज, जीपीएस रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के मिलान के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
‘रजिस्टर में व्हाइटनर’ से लेकर कथित वित्तीय नेटवर्क तक—SIT की जांच अब असली सिस्टम तक पहुंचेगी?
मामले में अब जांच केवल ट्रकों और राइस मिलों तक सीमित नहीं रह गई है। एसआईटी द्वारा जब्त दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच किए जाने की जानकारी है।
कुछ रिकॉर्ड में कथित रूप से व्हाइटनर के इस्तेमाल से प्रविष्टियां बदलने या छिपाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष फोरेंसिक और दस्तावेजी जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
इसी बीच, जांच में कथित तौर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बालाघाट के कुछ मिलरों और एथेनॉल प्लांट से जुड़े कथित लेनदेन में नकद या अन्य ऑफलाइन भुगतान की जांच की जा रही है, जबकि सिवनी और महाराष्ट्र से जुड़े कुछ कारोबारियों के ऑनलाइन लेनदेन से डिजिटल ट्रेल मिलने की संभावना जताई जा रही है।
एसआईटी अब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान, जब्त दस्तावेज और आरोपियों के बयानों का मिलान कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सरकारी चावल की कथित हेराफेरी में धन का प्रवाह किस दिशा में हुआ और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
असली सवाल: ‘छोटे खिलाड़ियों’ से आगे कब पहुंचेगी जांच?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच में सरकारी चावल के डायवर्जन, परिवहन में अनियमितता या वित्तीय लेनदेन से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो क्या कार्रवाई केवल ड्राइवरों, ट्रांसपोर्टरों और मिल कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर जांच उन अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंचेगी, जिनकी कथित भूमिका जांच में सामने आ सकती है?
एफसीआई, नागरिक आपूर्ति निगम और अन्य संबंधित संस्थानों की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल, 29 ट्रकों की कथित आवाजाही, फोर्टिफाइड चावल, 2025-26 की कस्टम मिलिंग के बोरे, स्टॉक रजिस्टर और ऑनलाइन-ऑफलाइन वित्तीय लेनदेन—ये सभी कड़ियां एसआईटी की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि जांच इन कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने ला पाती है या फिर मामला केवल कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
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