चूहों के साए में मासूमों की जिंदगी! मंडला अस्पताल की बदहाल तस्वीर.
Rats in Mandla District Hospital’s children’s ward have created a health crisis. Minister Sampatiya Uikey intervenes, ordering strict action against negligence. Urgent hospital reforms needed.
Mandla District Hospital’s children's ward faces a severe rat infestation, putting infants' lives at risk.
In the Shadow of Rats: The Miserable State of Mandla Hospital, Endangering Innocent Lives!
Rats are roaming freely in Mandla District Hospital’s children’s ward, endangering infants. Minister Sampatiya Uikey expressed outrage, ordering immediate action. The shocking conditions expose the hospital’s negligence, raising concerns over patient safety. Urgent measures are needed to control the rodent menace in the government hospital.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
मंडला: जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाएं एक बार फिर उजागर हुई हैं। इस बार मामला बेहद गंभीर है—अस्पताल के बच्चा वार्ड में चूहों का आतंक फैला हुआ है। वार्ड में भर्ती नवजात और छोटे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। चूहे बिस्तरों तक पहुंचकर बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन बेखबर बना हुआ है।
बच्चा वार्ड में चूहों का आतंक
मरीजों और उनके परिजनों ने शिकायत की है कि अस्पताल में चूहे न केवल बिस्तरों तक पहुंच रहे हैं, बल्कि रात में खाने तक को घसीटकर ले जाते हैं। मरीजों के परिजनों ने इस समस्या को कई बार अस्पताल प्रशासन के सामने रखा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कैबिनेट मंत्री ने जताई नाराजगी, कलेक्टर को दिए निर्देश
गुरुवार को अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचीं कैबिनेट मंत्री सम्पतिया उइके ने बच्चा वार्ड में फैली इस अव्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए तुरंत सुधार करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने इस मामले की जांच के लिए कलेक्टर को आदेश दिया और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। लेकिन इस घटना ने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।
प्रशासन की लापरवाही उजागर
यह घटना बताती है कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं किस हद तक अव्यवस्थित हैं। अस्पतालों में सफाई व्यवस्था लचर बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्थिति में सुधार हो पाता है या नहीं।