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राशन से रिश्वत तक, गोदामों से शराब फैक्ट्रियों तक: गरीबों का राशन बना भ्रष्टाचार का शिकार.

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Corruption in Madhya Pradesh PDS system, ration diversion to liquor factories, food grains rotting in warehouses, malnutrition crisis among children

From Ration to Bribes, From Warehouses to Liquor Factories: The Poor’s Ration Becomes a Victim of Corruption.

Harishankar Parashar, Senior Correspondent, Bhopal, MP Samwad.

Madhya Pradesh’s PDS corruption exposes a shocking nexus of officials and traders. From ration meant for the poor being diverted to liquor factories, to crores worth of food grains rotting in warehouses, the system reflects apathy and fraud. Meanwhile, millions of malnourished children continue to suffer in silence.

MP संवाद, भोपाल, मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक बार फिर भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में है। जबलपुर में सरकारी अफसरों और दुकानदारों ने मिलीभगत कर 25 करोड़ रुपये का राशन घोटाला कर दिया। यही नहीं, खाद्य आयुक्त के पहचान पत्र तक का दुरुपयोग किया गया। शिवपुरी में पुलिस ने गुजरात जा रहे 11.2 लाख रुपये के 412 क्विंटल चावल से भरे ट्रक को जब्त किया।


भूखों का हक लूटा, गोदामों में अनाज सड़ा

गंभीर सवाल यह है कि जिन पर गरीबों तक अनाज पहुँचाने की जिम्मेदारी है, वही इसे लूटने में लगे हैं।

  • कटनी: 5,000 टन गेहूं सड़ गया।
  • शहडोल: 1 लाख क्विंटल धान बारिश से बर्बाद।
  • जबलपुर: 16,000 मीट्रिक टन गेहूं सड़ा, कीमत ₹35 करोड़।
  • रीवा: 3 करोड़ का अनाज खराब।

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अब तक 9 लाख क्विंटल से ज्यादा अनाज सरकारी गोदामों में सड़ चुका है, जो पूरे राज्य को एक महीने तक खिलाने के लिए पर्याप्त था।


भ्रष्टाचार का काला खेल – अनाज से शराब तक

आरोप है कि अधिकारी और निजी कंपनियाँ मिलीभगत कर जानबूझकर अनाज को सड़ने देते हैं ताकि बाद में शराब कंपनियाँ उसे सस्ते दामों में खरीदकर बीयर और अन्य शराब बना सकें। यह सिर्फ कुप्रबंधन नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है।


बच्चे भूख से तड़प रहे, बजट लापरवाहों की जेब में

राज्य में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें से 1.36 लाख गंभीर रूप से कुपोषित हैं। मई 2025 तक 55 में से 45 जिले “रेड जोन” में दर्ज हुए। ₹4,895 करोड़ के पोषण बजट के बावजूद 38% बच्चे कुपोषित हैं।

न्यायपालिका और सवाल – क्या कभी सुधरेगी व्यवस्था?

जबलपुर हाईकोर्ट ने सभी कलेक्टरों से 4 हफ्तों में कुपोषण की रिपोर्ट माँगी है।
भारत का सर्वोच्च न्यायालय पहले ही कह चुका है –
“भूख से मर रहे देश में अनाज का एक भी दाना बर्बाद करना अपराध है।”
लेकिन हकीकत यह है कि मध्य प्रदेश में भूख और भ्रष्टाचार हाथ मिलाकर गरीबों का भविष्य निगल रहे हैं।


यह सिर्फ घोटाला नहीं—यह मानवीय और नैतिक विफलता है। यह भोजन के अधिकार का उल्लंघन है, कुपोषण को बढ़ावा है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है।

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