मौत के बाद भी विवाद! लवकुश का अंतिम संस्कार बना सवाल, बैगा समाज ने जाम किया रास्ता.
Controversy Even After Death! Luvkush’s Cremation Raises Questions as the Baiga Community Blocks the Road.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। बैगा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार सामने आ रही मौतों से आक्रोशित बैगा आदिवासियों और ग्रामीणों ने बालाघाट-बैहर मार्ग स्थित बंजारी तिराहे पर चक्का जाम कर दिया।
ताजा मामले में परसवाड़ा अस्पताल में उपचाररत 4 वर्षीय लवकुश की आज तड़के मौत होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि लवकुश मोहनपुर ग्राम पंचायत के बैगाटोला का निवासी था और मलेरिया से ग्रसित था।
इससे पहले MP संवाद समाचार ने भी बैगा बच्चों की मौत का आंकड़ा 26 तक पहुंचने की खबर प्रकाशित की थी।
मलेरिया से जूझता रहा 4 साल का लवकुश, माता-पिता हैदराबाद में
प्राप्त जानकारी के अनुसार लवकुश के माता-पिता रोजी-रोटी कमाने के सिलसिले में हैदराबाद गए हुए हैं। बच्चे की मौत की सूचना परिजनों ने उसके माता-पिता को दे दी है और बताया गया है कि वे हैदराबाद से वापस रवाना हो गए हैं।
एक ओर परिवार अपने मासूम बच्चे को खोने के सदमे से गुजर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस मौत ने दूरस्थ बैगा क्षेत्रों में मलेरिया, समय पर उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बालाघाट के बैगा क्षेत्रों में मलेरिया सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने की रिपोर्ट पहले भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
शव को लेकर विवाद, परिजनों का आरोप—बिना इंतजार अंतिम संस्कार
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब परिजनों के अनुसार मृत बच्चे का शव उसके माता-पिता के पहुंचने से पहले ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
परिजनों का आरोप है कि प्रशासन और डॉक्टरों ने मृत बच्चे का शव उसके दादा-दादी तथा अन्य रिश्तेदारों को सौंपने के बजाय मृतक के काका पर दबाव बनाकर दोपहर करीब 12 बजे ही अंतिम संस्कार करा दिया।
परिजनों के मुताबिक उन्हें यह कहा गया कि “बच्चे का शव रखने लायक नहीं है।”
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। शव को लेकर प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है। खासकर तब, जब क्षेत्र में लगातार बच्चों की मौतों को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
चक्का जाम से फूटा गुस्सा—सवाल अब इलाज से लेकर जवाबदेही तक
शव और अंतिम संस्कार को लेकर उपजे विवाद के बाद ग्रामीणों और बैगा आदिवासियों ने बंजारी तिराहे पर चक्का जाम कर दिया। यह विरोध केवल एक बच्चे की मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि लगातार हो रही मौतों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते अविश्वास और आक्रोश का संकेत बनता दिखाई दे रहा है।
अब प्रशासन के सामने कई सीधे सवाल हैं—लवकुश को मलेरिया का इलाज कब और कहां मिला? उसकी मेडिकल स्थिति क्या थी? क्या समय पर पर्याप्त उपचार उपलब्ध हुआ? और सबसे महत्वपूर्ण, उसके माता-पिता के पहुंचने से पहले अंतिम संस्कार कराने की जरूरत क्यों पड़ी?
इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के आधार पर सामने आना चाहिए।
बैगा क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर सर्वे, मलेरिया जांच और उपचार जैसी गतिविधियां चलाए जाने की जानकारी पहले भी सामने आई है। लेकिन लगातार सामने आ रहे नए मामलों के बीच अब केवल अभियान और दावों से आगे बढ़कर हर मौत की पारदर्शी मेडिकल जांच और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
Legal Disclaimer: This report is based on information received from local sources and relatives; allegations regarding treatment and cremation require official verification and response from competent authorities.