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सरकारें खामोश, प्रदूषण के खिलाफ अकेला लड़ रहा कटनी का लाल!

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Sunil Kushwaha showcasing air purifier to fight pollution in Katni, waiting for financial support

Governments remain silent, while Katni’s son fights pollution alone!

Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

A young innovator from Katni, Sunil Kushwaha, created a device that purifies 95% of polluted air, but financial hurdles have stalled his dream. Despite awards and 3,000+ orders, lack of government support has trapped his life-saving machine in a room, exposing the apathy towards grassroots innovation.

MP संवाद, कटनी जिले के बड़वारा तहसील अंतर्गत मझगवां गांव के रहने वाले सुनील कुशवाहा ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो वायुमंडल में मौजूद हानिकारक गैसों को प्यूरिफाई कर शुद्ध हवा में बदल देता है। हालांकि आर्थिक तंगी और सरकारी सहयोग के अभाव में यह इनोवेटिव मशीन एक बंद कमरे में सिसक रही है।

95 प्रतिशत हवा को करता है साफ

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके सुनील ने “स्काई ओजोन लेयर 0.5 स्मोक क्लीन एयर प्यूरिफायर” नामक यह मशीन तैयार की है। मशीन 95% तक प्रदूषित हवा को शुद्ध कर सकती है। इसमें F1 से F9 तक नौ स्तरों के फिल्टर लगे हैं जो क्रमबद्ध तरीके से जहरीली गैसों, कार्बन कणों और अन्य प्रदूषकों को फिल्टर करते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से इंडस्ट्रियल और शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने में कारगर हो सकती है।

सम्मान मिला, सहयोग नहीं

सुनील को उनकी इस उपलब्धि के लिए वर्ष 2020 में विभिन्न विभागों द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया था। उन्हें अब तक 3000 से अधिक ऑर्डर भी मिल चुके हैं, लेकिन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता नहीं मिलने के कारण उनका इनोवेशन अधूरा रह गया है। इस मशीन को बनाने में 3-4 लाख रुपये की लागत आती है, लेकिन किसी सरकारी योजना या वित्त पोषण से उन्हें अब तक कोई मदद नहीं मिली है।

आविष्कार की प्रेरणा

सुनील ने बताया कि एक बार ट्रेन में यात्रा के दौरान इंजन के पीछे वाले कोच में धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ हुई। वहीं से उन्हें शुद्ध हवा की आवश्यकता का अहसास हुआ। इसके बाद दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और बच्चों पर पड़ते प्रभाव की जानकारी ने उन्हें इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया।

सरकारी चक्कर और ठोस मदद का अभाव

सुनील ने पीएमओ सहित कई विभागों को पत्र और ईमेल भेजे, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी है। जबलपुर और कटनी सहित कई जिलों से उन्हें मौखिक आश्वासन तो मिले हैं, लेकिन धरातल पर कोई सहयोग नहीं दिखा।

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