रिकॉर्ड खरीदी के दावों के बीच घूस और रिजेक्शन का खेल.
Bribery and Rejection Game Amid Claims of Record Wheat Procurement.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी।
एक ओर जिला प्रशासन गेहूं खरीदी में रिकॉर्ड उपलब्धियों के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कटनी जिले के कई खरीदी केंद्रों की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लगातार निरीक्षण और निर्देशों के बावजूद केंद्रों पर अव्यवस्थाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिले के अनेक खरीदी केंद्रों में खरीदे गए गेहूं का भारी स्टॉक जमा हो चुका है। केंद्रों पर गेहूं की बोरियों के अंबार लगे हैं, लेकिन समय पर परिवहन और वेयरहाउस में भंडारण नहीं हो पा रहा है।
वेयरहाउस में एंट्री के लिए भी “घूस” देने के आरोप
खरीदी प्रभारियों का आरोप है कि केंद्रों से गेहूं लोड कर वाहन भेजने के बाद भी वेयरहाउस में गाड़ी प्रवेश कराने तक के लिए कथित रूप से रिश्वत देनी पड़ रही है। इसके बावजूद कई मामलों में 100 से 150 बोरी तक गेहूं रिजेक्ट कर दिया जाता है।
इससे खरीदी प्रभारियों पर आर्थिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ता जा रहा है, जबकि जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
भुगतान अटका, किसान परेशान
इस अव्यवस्था का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। गेहूं का भुगतान समय पर नहीं होने से किसानों की राशि अटक रही है। कई खरीदी केंद्रों में जगह की कमी के कारण गेहूं खुले में रखा जा रहा है, जिससे मौसम खराब होने पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
पिछले कुछ दिनों से मौसम में बदलाव और बारिश के कारण केंद्र प्रभारी भी चिंता में हैं।
ढीमरखेड़ा के 11 केंद्र जबलपुर से जुड़े, बढ़ी दिक्कतें
ढीमरखेड़ा क्षेत्र के लगभग 11 खरीदी केंद्रों की मैपिंग कटनी जिले से हटाकर जबलपुर से जोड़ दिए जाने के कारण परिवहन, मॉनिटरिंग और समन्वय में कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं। इससे व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
तौल में 2 किलो अतिरिक्त लेने के आरोप
स्लीमनाबाद क्षेत्र के कुछ खरीदी केंद्रों में किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि तौल के नाम पर प्रति तौल लगभग 2 किलो अतिरिक्त गेहूं लिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि मजबूरी में वे विरोध नहीं कर पा रहे, क्योंकि उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है।
निरीक्षण जारी, लेकिन हालात जस के तस
Ashish Tiwari लगातार खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दे रहे हैं। इसके बावजूद जमीनी हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
किसानों और खरीदी प्रभारियों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
बड़ा सवाल
जब रिकॉर्ड खरीदी के दावे किए जा रहे हैं, तो वेयरहाउस में कथित घूस, गेहूं रिजेक्शन और किसानों की अटकी भुगतान राशि का जिम्मेदार कौन है?