सील टूटी या सिस्टम झुका? अतिक्रमण का विवाद कायम, दो दिन में फिर चालू हुए क्रैशर!
Seal Broken or System Bent? Encroachment Dispute Remains, Yet Crushers Resume Operations Within Two Days!

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले के कनौर-बिचपुरा क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे अवस्थी क्रैशर और महालक्ष्मी मिनरल्स एक बार फिर चर्चा में हैं। इन क्रैशर प्लांटों पर शासकीय भूमि एवं आम रास्ते पर कथित अतिक्रमण के आरोपों के बाद प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है।
बताया जा रहा है कि प्रशासन ने दोनों क्रैशर प्लांटों को सील किया था, लेकिन महज दो दिन बाद ही दोनों प्लांट दोबारा संचालित होने लगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि कथित अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हटाया गया था, तो आखिर सील खोलने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
प्रशासनिक टीम पहुंची, मौके पर हुआ निरीक्षण
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित, बरही के नायब तहसीलदार, एसडीएम विवेक गुप्ता और पुलिस बल मौके पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि टीम द्वारा क्रैशर परिसर का निरीक्षण किया गया और मौके की स्थिति का फोटो रिकॉर्ड भी तैयार किया गया।
स्थानीय सूत्रों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निरीक्षण के बाद एसडीएम मौके से रवाना हो गए। इसके बाद पंचनामा तैयार किए जाने और दोनों सील किए गए क्रैशर प्लांटों को दोबारा संचालित किए जाने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया और सील खोलने के आधार को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी बाकी है।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई थी कार्रवाई
पूर्व में कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर संयुक्त प्रशासनिक टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
बताया गया था कि शासकीय भूमि एवं आम रास्ते पर करीब 0.65 हेक्टेयर क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के मामले को लेकर दोनों क्रैशर प्लांटों पर कार्रवाई की गई थी।
इसके साथ ही महालक्ष्मी मिनरल्स के तीन और अवस्थी क्रैशर के एक कन्वेयर को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
कन्वेयर हटे, लेकिन कथित कब्जे का क्या?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान मुख्य रूप से कन्वेयर बेल्ट हटाई गई, जबकि जिस भूमि को लेकर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था, वहां स्थिति पूरी तरह नहीं बदली।
यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठता है कि जब कथित अतिक्रमण का मूल विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था, तब क्रैशर प्लांटों की सील खोलने का आधार क्या था?
क्या प्रशासन ने अतिक्रमण हटाए जाने की दोबारा माप या सीमांकन रिपोर्ट तैयार की?
क्या संबंधित भूमि की वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया गया?
और क्या सील खोलने से पहले सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति ली गई?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासन से अपेक्षित हैं।
‘सील’ के बाद इतनी जल्दी ‘री-ओपनिंग’ क्यों?
किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यदि सील किए गए व्यावसायिक प्रतिष्ठान को दोबारा संचालित करने की अनुमति दी जाती है, तो इसके पीछे स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया और दस्तावेज होना जरूरी है।
ऐसे में सवाल यह है कि दोनों क्रैशर प्लांटों को दोबारा संचालन की अनुमति किन शर्तों पर दी गई और क्या उन शर्तों का पालन मौके पर सुनिश्चित किया गया?
SDM बोले—बेल्ट हटाई गई, कार्रवाई की गई
इस मामले में बरही के एसडीएम विवेक गुप्ता का कहना है कि क्रैशर प्लांटों की बेल्ट उतरवाई गई है और कार्रवाई की गई है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसे केवल औपचारिक कार्रवाई बताया जा रहा है।
अब वास्तविक स्थिति क्या है, यह स्पष्ट करने के लिए प्रशासन द्वारा अतिक्रमण की स्थिति, सीमांकन, पंचनामा और सील खोलने की प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई हुई या सिर्फ खानापूर्ति?
कनौर-बिचपुरा के इस मामले में सवाल सिर्फ क्रैशर प्लांटों के दोबारा शुरू होने का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की विश्वसनीयता का भी है।
यदि अतिक्रमण हटाया गया है, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी भूमि मुक्त कराई गई और किस दस्तावेज के आधार पर कार्रवाई पूर्ण मानी गई।
और यदि अतिक्रमण अभी भी मौजूद है, तो सील हटाकर क्रैशर संचालन की अनुमति देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। क्या मामले की दोबारा जांच होगी? क्या भूमि का पुनः सीमांकन कराया जाएगा? और क्या सील खोलने की प्रक्रिया की भी समीक्षा होगी?
इन सवालों का जवाब ही यह तय करेगा कि कनौर-बिचपुरा में हुई कार्रवाई वास्तव में कठोर प्रशासनिक कार्रवाई थी या महज औपचारिकता।
Disclaimer: This report presents allegations and official statements regarding administrative action. Claims remain subject to verification, clarification, investigation, and due legal process.