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अवैध तरीके से चल रहे ईट भट्टे, खनिज विभाग व पर्यावरण विभाग गहरी नींद में.  

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Illegal brick kilns are operating, and the Mineral Department and Environment Department are in deep sleep.

मलखान सिंह परमार मुरैना

मुरैना ! मुरैना जिले भर में अवैध तरीके से चल रहे ईट भट्टे प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है !

Morena; Sahara Samachaar;

लाल ईट बनाने वाले ईट भट्ठा संचालकों द्वारा कई जगह ईट भट्टे का निर्माण कर लाखों रूपयें की कमाई की जा रही है, वहीं पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है, जबकि ईट भट्ठा के लिए पहले खनिज विभाग व पर्यावरण से इसकी मंजूरी लेकर ईट बनाने का कार्य किया जाता है, लेकिन इस क्षेत्र के रसूखदारों द्वारा बिना स्वीकृति लिए ही ईट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है। अवैध ईट भट्ठों से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राजस्व एवं पानी, मिट्टी, चोरी की बिजली का जमकर इस्तेमाल जमकर किया जा रहा है। इसके कारण लगातार भू जल स्तर गिरता जा रहा है। माखननगर तहसील क्षेत्र के अधिकतर गांवों में जिसमे बागरा,मानागांव, मनबाड़ा,गुड़ारिया मोती , आंचलखेड़ा, पवारखेड़ा खुर्द आदि गांवो में अवैध ईंट भट्टों का संचालन जोरो पर है जिन पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नही होने से अवैध ईंट भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद है। राजस्व और खनिज विभाग की उदासीनता के चलते क्षेत्र में बेखौफ ईंट भट्टों की संख्या बढ़ती जा रही है। कार्रवाई नही होने से संचालकों के हौसले बुलंद अवैध ईट भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के अभाव में इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। ये लोग बड़े पैमाने पर ईंट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। मगर कार्रवाई नहीं होने से अवैध कारोबार फल फूल रहा है।

अधिक मुनाफा के चलते अवैध करोबार ईंट के व्यपारियों से जुड़े लोगों का मानना है कि ईंट के व्यवसाय में काफी मुनाफा है यही कारण है कि सारे नियम कानून को ताक पर रख कर अवैध ईंट का भट्ठा संचालित किया जा रहा है। अवैध ईंट भट्ठों के चलते शासन को राजस्व नुकसान हो रहा है। भट्ठा संचालक ज्यादा कमाई के लिए सभी नियमों को ताक पर रखने से भी परहेज नही कर रहे है और खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को यह नजर नहीं आ रहा है कि जब ईंट बनाने की अनुमति ही नहीं है फिर ये ईंटें कहां से और कैसे आ रही हैं यह जानने की फुरसत संबंधित विभागों को नहीं हैं।

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