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पर्यटन नगरी बन सकता है ग्यारसपुर, लेकिन प्रशासन क्यों है उदासीन?

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Gyaraspur, a historic town filled with temples and ancient relics, holds immense tourism potential. But why is it still overlooked?

An aerial view of Gyaraspur’s historical temples and monuments, showcasing its rich cultural heritage and tourism potential.

Gyaraspur’s breathtaking ancient structures waiting to be recognized as a tourism hub.

Gyaraspur can become a tourism city, but why is the administration indifferent?

Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.

विदिशा, ग्यारसपुर मुख्यालय में एसडीएम कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय, तहसील कार्यालय और अन्य सभी ब्लॉक स्तरीय सरकारी कार्यालय मौजूद हैं। यह नगर भोपाल से 100 किलोमीटर और विदिशा से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और नेशनल हाईवे 146 से जुड़ा हुआ है।

ग्यारसपुर का ऐतिहासिक गौरव

ग्यारसपुर 9वीं और 10वीं सदी की अनेक ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें माला देवी मंदिर, हिंडोला तोरण, आठ खम्बा, बजारा मठ (सूर्य मंदिर), ढैकीनाथ बौद्ध स्तूप, मानसरोवर झील और विश्वसुंदरी शालभंजिका की मूर्ति शामिल हैं। प्राचीन काल में यह नगर अपनी गौरवशाली, सांस्कृतिक और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता था। लेकिन आज ये धरोहरें संरक्षण और विकास के अभाव में उपेक्षित हैं।

पुरातात्विक धरोहरों की अनदेखी

ग्यारसपुर में परमार काल और प्रतिहार काल की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं, लेकिन पुरातत्व और पर्यटन विभाग की उदासीनता के कारण इस क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है।

यहां की मां बिजासन देवी पहाड़ी पर बौद्ध स्तूपों का जखीरा मौजूद है। यहां से कुछ साल पहले भगवान बुद्ध की 5 फीट लंबी प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसे अभी तक उसी स्थान पर रखा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में कई और मंदिर और धरोहरें दबे हो सकते हैं, क्योंकि यहां नक्काशीदार बड़े पत्थर, पिलर और शिवलिंगों के अवशेष देखे जा सकते हैं।

75 वर्षीय स्थानीय निवासी रतन पटेल बताते हैं कि ग्यारसपुर में पुरासंपदा बिखरी पड़ी है। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में यहां 1100 शिवलिंग हुआ करते थे, जिनमें से आज भी सैकड़ों की संख्या में शिवलिंग मंदिरों, चबूतरों और पहाड़ियों में मौजूद हैं

ग्यारसपुर का पर्यटन विकास क्यों जरूरी?

ग्यारसपुर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का केंद्र रहा है, लेकिन पर्यटन विभाग की बेरुखी के कारण यह आज तक देश और दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान नहीं बना पाया

वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारें पर्यटन को बढ़ावा दे रही हैं, तो ग्यारसपुर को भी पर्यटन नगरी का दर्जा क्यों न मिले? स्थानीय निवासी लगातार इस मांग को उठा रहे हैं कि सरकार इस ओर ध्यान दे।

इसके अलावा, भोपाल-सागर ग्यारसपुर नेशनल हाईवे 146 को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है। यदि ग्यारसपुर को पर्यटन नगरी घोषित किया जाता है, तो इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और यह क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध होगा।

सरकारी अधिकारियों की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर जब स्थानीय सरपंच राजू कुशवाहा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के पास इतनी वित्तीय सहायता नहीं होती कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें

वहीं, पुरातत्व विभाग के सीईओ संदीप महंतो ने जानकारी दी कि बजारा मठ के संरक्षण कार्य को जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने माला देवी मंदिर के बारे में बताया कि 2019 में वहां कांच की प्लेटें लगाई गई थीं, ताकि मंदिर में किसी भी प्रकार की क्षति का तुरंत पता चल सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मंदिर के संरक्षण का कार्य किया जाएगा

निष्कर्ष

ग्यारसपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इसकी उपेक्षा की जा रही है। यदि इसे पर्यटन नगरी घोषित किया जाए और इसके संरक्षण और विकास पर ध्यान दिया जाए, तो यह न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि ग्यारसपुर का खोया हुआ वैभव फिर से लौट सके।

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