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मेंटेनेंस के नाम पर भ्रष्टाचार की आग में झुलसी फायर ब्रिगेड.

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मेंटेनेंस के नाम पर हुए भ्रष्टाचार का नतीजा, गांव में असहाय फायर ब्रिगेड।

A tractor towing a broken fire brigade vehicle in a dusty village road.

गांव में दम तोड़ती फायर ब्रिगेड, ट्रैक्टर से टोचन कर लाई गई।

Fire Brigade Scorched in the Flames of Corruption Disguised as Maintenance.

Special Correspondent, Maiher, MP Samwad.

रामनगर में आग बुझाने निकली फायर ब्रिगेड रास्ते में ही दम तोड़ गई — हालिया मेंटेनेंस पर सवाल, भ्रष्टाचार की बू साफ नजर आई। लाखों खर्च के बाद भी नतीजा शून्य। जवाबदेही तय कौन करेगा?

Fire brigade in Ramnagar collapses en route to emergency — raising serious questions over recent maintenance claims and suspected corruption. Despite lakhs spent, the vehicle fails, exposing negligence and possible misuse of public funds. Who is accountable?

मैहर: जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के हटवा गांव में शुक्रवार को नगर परिषद की लापरवाही और भ्रष्टाचार की परतें एक बार फिर सामने आ गईं। आग बुझाने के लिए बुलाई गई फायर ब्रिगेड रास्ते में ही खराब हो गई और उसे ट्रैक्टर से टोचन कर वापस नगर परिषद लाना पड़ा।

? मेंटेनेंस पर उठे गंभीर सवाल

चौंकाने वाली बात यह है कि यह वही फायर ब्रिगेड है, जिसका मेंटेनेंस दो महीने तक रीवा में कराया गया था। अब सवाल उठता है कि क्या मेंटेनेंस के नाम पर केवल गाड़ी खड़ी कर दी गई थी? या वाकई में किसी प्रकार का सुधार कार्य हुआ भी था?

? इंजीनियर की देखरेख में हुआ मेंटेनेंस, फिर भी खराब?

पूर्व सीएमओ द्वारा मेंटेनेंस का आदेश एजेंसी को दिया गया था और जिम्मेदारी इंजीनियर ओमप्रकाश द्विवेदी को सौंपी गई थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार, मेंटेनेंस किसी अधिकृत एजेंसी से नहीं, बल्कि रीवा की एक “चहेती” फर्म से करवाया गया, जो प्राइवेट तौर पर मरम्मत का काम करती है।

? क्या बिना मेंटेनेंस के लौटाई गई गाड़ी?

फायर ब्रिगेड पहले भी कमीशनखोरी का शिकार रही है। हर बार लाखों रुपये मेंटेनेंस में खर्च किए जाते हैं, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। अब तक फायर ब्रिगेड पर इतनी रकम खर्च हो चुकी है कि दो-तीन नई गाड़ियां खरीदी जा सकती थीं। ऐन वक्त पर मशीन के फेल होने से ये सवाल उठता है—क्या वास्तव में कोई मेंटेनेंस हुआ भी था?

? जिम्मेदारी तय होगी या मामला दब जाएगा?

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी इस लापरवाही की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करेंगे? या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?

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