ट्रक, टोल और ट्रांसपोर्ट… फिर भी गायब हो गया सरकारी चावल!
Trucks, Tolls, and Transport… Yet the Government Rice Vanished!

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में FCI गोदाम नवेगांव से एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए शासकीय चावल के कथित गबन और अफरा-तफरी मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रारंभिक जांच और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एथेनॉल प्लांट के लिए आवंटित चावल की बड़ी मात्रा अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची। MP संवाद समाचार ने 10 जनवरी 2026 को अपने एक समाचार में इस संगठित लूट को लेकर एक समाचार प्रकाशित किया था जिसका हेडलाइन “गरीब की थाली से एथेनॉल की टंकी तक! बालाघाट में फोर्टिफाइड चावल का संगठित लूट” जिसका लिंक हम यहां दे रहे है
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब एफसीआई गोदाम से रवाना हुए ट्रकों, उनके मार्ग, टोल रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेजों और एथेनॉल प्लांट के रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
64 ट्रकों में भेजा गया चावल, लेकिन रिकॉर्ड पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार 18 अप्रैल 2026 से 3 जून 2026 के बीच नवेगांव एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित एथेनॉल प्लांट के लिए 64 ट्रकों में चावल भेजा गया।
यदि प्रति ट्रक औसतन 240 क्विंटल चावल माना जाए, तो हजारों क्विंटल शासकीय चावल इस अवधि में रवाना किया गया। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पूरा चावल वास्तव में एथेनॉल प्लांट पहुंचा भी था या नहीं।
जांच में सामने आ रही नई कड़ियां
SIT द्वारा ट्रक चालकों, हेल्परों, मिलर्स और एथेनॉल प्लांट कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियां निम्न बिंदुओं पर विशेष फोकस कर रही हैं—
- ट्रकों के GPS और लोकेशन रिकॉर्ड
- टोल प्लाजा से गुजरने का डेटा
- एथेनॉल प्लांट के रिसीविंग रिकॉर्ड
- एफसीआई डिस्पैच दस्तावेज
- संबंधित मिलों और गोदामों का रिकॉर्ड
एक ट्रक राइस मिल में मिला, दो अन्य भी बरामद
3 जून को एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना किए गए तीन ट्रकों में से एक ट्रक वारासिवनी स्थित एक राइस मिल परिसर से बरामद किया गया था। जांच के दौरान उसमें 242 क्विंटल से अधिक चावल पाया गया।
इसके बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। वहीं दो अन्य ट्रकों को भी बाद में बरामद कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया।
क्या राइस मिलों तक पहुंचा सरकारी चावल?
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि एथेनॉल प्लांट के लिए जारी कुछ चावल कथित रूप से अन्य स्थानों पर खपाया गया हो।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
सबसे बड़ा सवाल: सिस्टम की निगरानी कहां थी?
मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- यदि ट्रक निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंचे तो निगरानी तंत्र ने अलर्ट क्यों नहीं किया?
- GPS आधारित मॉनिटरिंग के बावजूद कथित अनियमितता कैसे हुई?
- क्या केवल ट्रांसपोर्ट स्तर पर गड़बड़ी हुई या पूरी सप्लाई चेन की भूमिका की जांच जरूरी है?
- क्या प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय होगी?
गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई राज
जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि मामले में नामजद आरोपियों और अन्य संदिग्धों से विस्तृत पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
फिलहाल SIT सभी कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि एफसीआई गोदाम से निकला शासकीय चावल आखिर किस रास्ते गया और उसका वास्तविक उपयोग कहां हुआ।