चावल हेराफेरी केस में FCI का बड़ा दावा— ₹1160 करोड़ का आंकड़ा गलत.
FCI Makes a Major Claim in Rice Diversion Case: ₹1,160 Crore Figure Is Incorrect.
Special Correspondent, Anand Tamrakar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में इथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित FCI चावल की कथित हेराफेरी को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं। FCI ने कुछ मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित ₹1,160 करोड़ और 5 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल की कथित हेराफेरी के दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है।
FCI का दावा— जांच पूरे स्टॉक की नहीं, केवल 242.50 क्विंटल चावल की
प्रेस नोट के अनुसार, वर्तमान जांच पूरे 5 लाख मीट्रिक टन चावल से संबंधित नहीं है, बल्कि 490 बोरी (242.50 क्विंटल) चावल की कथित हेराफेरी से जुड़ी है।
FCI का कहना है कि इस मात्रा का अनुमानित मूल्य लगभग ₹5.63 लाख है। ऐसे में पूरे आवंटित स्टॉक का मूल्य ₹1,160 करोड़ बताकर उसे कथित हेराफेरी से जोड़ना भ्रामक है।
₹1,160 करोड़ की राशि कैसे बनी?
FCI के अनुसार, ₹1,160 करोड़ की राशि उस कुल मूल्य को दर्शाती है, जो 5 लाख मीट्रिक टन चावल के लिए डिस्टिलरी कंपनियों द्वारा FCI को निर्धारित दर पर भुगतान किया गया।
निगम का कहना है कि इसे कथित हेराफेरी की राशि के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों के अनुरूप नहीं है।
FCI ने जारी की कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन
प्रेस नोट में FCI ने बताया कि—
- 5 जून 2026 को अनियमितता सामने आने पर संबंधित डिस्टिलरी को नोटिस जारी किया गया।
- उसी दिन राज्य खाद्य विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई।
- 11 जून 2026 को DFPD एवं FCI की संयुक्त निरीक्षण टीम ने मौके का निरीक्षण किया।
- जांच लंबित रहने तक संबंधित डिस्टिलरी की सिक्योरिटी राशि रोक दी गई।
- संबंधित फर्म को आगे चावल आवंटन रोक दिया गया।
- NABARD को ब्याज सब्सिडी जारी नहीं करने के निर्देश दिए गए।
- मध्यप्रदेश सरकार ने SIT गठित की तथा संबंधित राइस मिल पर ₹44.12 लाख का जुर्माना लगाकर उसे ब्लैकलिस्ट किया।
FCI बोला— कार्रवाई मीडिया रिपोर्ट से पहले शुरू हो चुकी थी
FCI ने अपने प्रेस नोट में दावा किया कि कथित अनियमितता का पता सरकारी निगरानी तंत्र से चला था और प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले ही शुरू कर दी गई थी।
निगम ने कहा कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब कई सवालों पर रहेगी नजर
हालांकि FCI ने प्रेस नोट के माध्यम से अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है, लेकिन पूरा मामला अभी भी SIT की जांच के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितता का वास्तविक दायरा क्या था और किन पक्षों की क्या जिम्मेदारी बनती है।
Legal Disclaimer.
This report summarizes FCI’s official press note. Findings remain subject to ongoing investigations, and final conclusions will be determined by competent authorities.
