नाम सुविधा, काम अव्यवस्था! कटनी में छात्रावास में हालात खराब.
Facilities in Name Only, Mismanagement in Reality! Poor Conditions in Katni Hostel

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
कटनी जिले के रीठी स्थित शासकीय सीनियर अनुसूचित जाति नवीन छात्रावास में छात्रों को सुविधाओं के बजाय अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है।
मेन्यू सिर्फ दीवार पर, थाली में नहीं”
छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि:
- छात्रावास में मेन्यू चार्ट तो लगा है, लेकिन उसके अनुसार भोजन नहीं मिलता
- रोज एक ही तरह की घटिया सब्जी परोसी जाती है
- कच्ची रोटी और पतली दाल दी जाती है
- चावल की मात्रा इतनी कम होती है कि पेट तक नहीं भरता
👉 छात्रों के मुताबिक, भोजन में सिर्फ नमक और पानी का स्वाद आता है।
“डर के माहौल में रह रहे छात्र”
छात्रों का कहना है कि:
👉 अधीक्षक द्वारा अक्सर डांट-फटकार की जाती है
👉 जिससे छात्रावास में डर और दबाव का माहौल बना रहता है
करोड़ों की बिल्डिंग, सुविधाएं शून्य
यह छात्रावास करोड़ों रुपये की लागत से बना है, लेकिन:
👉 बुनियादी सुविधाएं तक छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं
👉 इससे निर्माण और प्रबंधन दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं
अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग
मामले को लेकर:
👉 ग्रामीणों और अभिभावकों ने
👉 उच्च अधिकारियों से छात्रावास की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है
विभाग का पक्ष
इस मामले में जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग विमल चौरसिया का कहना है:
👉 “बच्चों की परीक्षा हो चुकी है। भोजन व्यवस्था ठीक है। कुछ लोग आपसी खींचतान के कारण शिकायत कर रहे हैं। अधीक्षक को समझाया गया है और आगे निरीक्षण किया जाएगा।”
बड़ा सवाल: बजट कहाँ जा रहा है?
अब सवाल यह उठता है:
👉 जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो छात्रों को सही भोजन और सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही?
👉 क्या यह मामला सिर्फ लापरवाही है या फिर फंड के दुरुपयोग का संकेत?
👉 क्या जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी?
कटनी का यह मामला
👉 सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है।