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घोटालेबाज़ों को विभाग का सहारा? दमोह में आदेशों की खुली अवहेलना.

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Damoh Education Fraud mpsamwad.com

Are Scammers Being Shielded by the Department? Open Defiance of Orders in Damoh.

Special Correspondent, Damoh, MP Samwad.

In Damoh district, no action has been taken against teachers hired through fake documents, despite the Collector’s orders. No FIR or recovery has been initiated. The silence of the education department and the DEO’s alleged role raise serious questions about transparency and accountability within the system.

MP संवाद, दमोह। दमोह जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के स्पष्ट कलेक्टर निर्देश के बावजूद विभाग चुप्पी साधे बैठा है। एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई।

अब तक 24 फर्जी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, लेकिन ये महज़ दिखावा लगता है। इन शिक्षकों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर वर्षों तक वेतन उठाया और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। फिर भी न कोई आपराधिक प्रकरण, न वेतन वसूली की प्रक्रिया — क्या यह घोटालेबाजों को संरक्षण नहीं है?


?️‍♂️ डीईओ की भूमिका संदेह के घेरे में

सूत्रों के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा खुद कार्रवाई को धीमा करने की कोशिश कर रहे हैं। विभाग के भीतर मिलीभगत की आशंका इस बात से और प्रबल होती है कि जहां कार्रवाई में तेजी दिखनी चाहिए, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।

कई जानकारों का मानना है कि फर्जी नियुक्तियों में डीईओ की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है और इसी वजह से कार्रवाई को टालने का प्रयास किया जा रहा है।


⚠️ प्रशासनिक लापरवाही या खुला संरक्षण?

कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने और लाभ वसूली के निर्देश साफ तौर पर दिए थे। लेकिन विभाग की निष्क्रियता अब महज लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षणवाद का इशारा करती है।

क्या शिक्षा विभाग के भीतर से ही फर्जीवाड़े को सहारा मिल रहा है?

? अब समय है सख्त कार्रवाई का

जब जिले का सबसे वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई चाहता है और अधीनस्थ अधिकारी जानबूझकर टालमटोल कर रहे हैं, तो यह प्रशासन की साख पर गंभीर चोट है।

यह सिर्फ फर्जी शिक्षकों का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल है। यदि अब भी प्रशासन चुप रहा, तो यह घोटाला और भी गहरा जाएगा।

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