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चेतकपुरी की सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की बिछी चादर! रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे.

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mpsamwad.com Chetakpuri Road Scam

Not a Road, but a Sheet of Corruption in Chetakpuri! Shocking Revelations in the Report.

Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad.

A technical report reveals massive corruption in Gwalior’s Chetakpuri Road construction. Violations in drainage, layering, and asphalt work led to road collapses just 14 days after completion. Officials overlooked critical flaws and continued payments, exposing a shocking nexus between contractors and civic authorities. Major action is now expected.

MP संवाद, ग्वालियर की बहुचर्चित चेतकपुरी रोड को लेकर कलेक्टर द्वारा गठित तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट सामने आ गई है, और इसके निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि सड़क निर्माण में भारी लापरवाही, तकनीकी अनियमितता और ठेकेदार की मनमानी की गई। वहीं, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंद ली और ठेकेदार को समय पर भुगतान करते रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क निर्माण में तय मानकों को ताक पर रखकर कार्य किया गया। लगभग 2 मीटर गहराई में स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज पाइप बिछाने के बाद ठेकेदार जैन एंड राय को 7 लेयर में मिट्टी और मुरम भरने की प्रक्रिया अपनानी थी, लेकिन कंपनी ने एक साथ पूरी खुदाई भर दी। कम्पैक्शन के लिए वाइब्रेटर रोलर के बजाय सिर्फ साधारण रोलर का उपयोग किया गया, जिससे बेस ढीला रह गया और बारिश के बाद सड़क धंसने लगी।

डामर लेयर में भी भारी गड़बड़ी

डामरीकरण का कार्य करने वाली कंपनी एचएनएस कॉन्ट्रैक्टर्स एंड डेवलपर्स ने तय 4 सेंटीमीटर की डामर परत की जगह कहीं 2.5 तो कहीं 3 सेंटीमीटर की परत ही बिछाई। कमजोर बेस और घटिया लेयर के कारण सड़क का ऊपरी भाग भी जल्द ही उखड़ गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कंपनी को बेस की कमजोरी की जानकारी होने के बावजूद डामर बिछाने का कार्य जारी रखा गया। नगर निगम को केवल औपचारिक पत्र भेजकर खानापूर्ति कर दी गई।

14 दिन में 8 बार धंसी सड़क, ग्वालियर बना राष्ट्रीय मज़ाक

जांच में यह तथ्य सामने आया कि सड़क केवल 14 दिनों में 8 बार धंस चुकी है। इस घटना ने ग्वालियर को राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर दिया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क कुछ महीनों में ही जर्जर हो गई, जिससे शासन, प्रशासन और ठेकेदारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध

जांच में नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत सामने आई है। ठेकेदार की मनमानी के बावजूद समय पर भुगतान किया गया। अब इस पूरे प्रकरण की मेजरमेंट बुक (MB) की भी जांच की जा रही है, जिससे यह पता चल सके कि किन स्तरों पर मानकों को दर्ज कर अनदेखा किया गया।

अब होगी कार्रवाई

कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि तकनीकी समिति ने रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें फिलिंग और डामरीकरण दोनों में गंभीर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। यह रिपोर्ट नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त को भेज दी गई है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम आयुक्त संघप्रिय दास ने कहा कि उन्हें अभी रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन प्रारंभिक जांच में कम्पैक्शन में गंभीर खामी पाई गई है। लापरवाह अधिकारियों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और रिपोर्ट आने के बाद ठेकेदारों पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

मेयर शोभा सिकरवार ने खुलासा किया कि सरकार से जुड़े कुछ लोगों ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर बरसात के दौरान ही सड़क निर्माण शुरू करवाया, जबकि अधिकारी इसके पक्ष में नहीं थे।

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