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भोपाल को नहीं मिला कैंसर अस्पताल, इकलौते एम्स में मरीजों की लंबी कतार

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Bhopal did not get a cancer hospital, long queue of patients in the only AIIMS

sahar samachaar aiims

एम्स में एक साल पहले शुरू हुए कैंसर विभाग में पहुंच गए 41 हजार से अधिक रोगी। लंबी हुई प्रतीक्षा सूची। इलाज की आस में बेइंतहा दर्द भोग रहे हजारों पीड़ित।

  • हमीदिया अस्पताल में साल 2021 में कैंसर के 5096 मरीज इलाज के लिए आए।
  • साल 2022 में यह आंकड़ा 6533 तक पहुंच गया।
  • 2023 में कैंसर के 7121मरीज इलाज के लिए हमीदिया के आन्कोलाजी विभाग पहुंचे।

भोपाल। देश-दुनिया की तरह प्रदेश में भी कैंसर तेजी से पैर पसार रहा है। साल दर साल महिलाओं व पुरुषों में कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि भोपाल में आज तक अलग अस्पताल तैयार करना तो दूर मेडिकल कालेज में इसका विभाग ही पूरी सुविधाओं के साथ शुरू नहीं हो सका। इस बीच कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ते-बढ़ते हजारों में पहुंच चुकी है। इधर भोपाल एम्स में एक वर्ष पूर्व से कैंसर विभाग ने विधिवत काम करना शुरू कर दिया है लेकिन यहां पहले ही वर्ष में 41 हजार से अधिक रोगी पहुंचने से मौजूदा संसाधन कम पड़ रहे हैं। यहां प्रतीक्षा सूची इतनी लंबी हो चुकी है कि महीनों पहले उपचार मिलना मुश्किल है। राजधानी में एम्स सहित अन्य अस्पतालों में हर साल कैंसर के 44 से 45 हजार मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल अस्पताल के साथ एक कैंसर स्पेशलिटी अस्पताल भी बनाना जरूरी है। जिससे कैंसर मरीजों को इलाज के लिए भटकना ना पड़े।

हमीदिया बन सकता था कैंसर अस्पताल
एनएचएम के पूर्व संचालक डा. पंकज शुक्ला कहते हैं, प्रदेश की राजधानी में ही सरकार की ओर से कैंसर उपचार की व्यवस्था सबसे कमजोर है। हमीदिया में आसानी से कैंसर अस्पताल विकसित किया जा सकता था, लेकिन इसके लिए कभी पूरी ताकत से प्रयास नहीं किए गए। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में कीमोथैरेपी की व्यवस्था की। लेकिन राजधानी में एक सुविधाओं से सुसज्जित कैंसर अस्पताल की जरूरत है।
दोनों विभाग के विशेषज्ञों का सही उपयोग
शुक्ला बताते हैं, शासन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग को एक विभाग बनाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों विभागों के विशेषज्ञ, स्थान, सुविधाएं और बजट का सही उपयोग करना जरूरी है। यह एक समय है जिससे कैंसर जैसे गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को एक स्थान पर पूर्ण और सटीक इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। शहर के लिए कैंसर अस्पताल बनाना अच्छा विकल्प हो सकता है।

शहर में कैंसर मरीज

हमीदिया अस्पताल में साल 2021 में कैंसर के 5096 मरीज इलाज के लिए आए। वहीं साल 2022 में यह आंकड़ा 6533 दर्ज किया गया। साल 2023 में 7121 कैंसर के मरीज इलाज के लिए हमीदिया के आन्कोलाजी विभाग पहुंचे। यानी 20 से 25 मरीज रोजाना ओपीडी में आए। एम्स भोपाल में बीते साल प्रदेश भर से 41 हजार 323 कैंसर के मरीज इलाज के लिए पहुंचे। एम्स अस्पताल में रोजाना आनकोलाजी सर्जरी और रेडियोलाजी विभाग के मिलाकर रोजाना 200 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं।
कैंसर का उपचार शुरू करने के लिए 25 से 30 करोड़ की यूनिट लगाई जाती है। इसे सरकार तीन साल में वसूल कर सकती है। लेकिन आयुष्मान के पैसों को सरकार ऐसे भी बचा सकती है। सरकार के लिए कोई यह बड़ी रकम भी नहीं है।

डा.ओपी सिंह, कैंसर विशेषज्ञ

ऐसे बढ़ रहे मरीज,
(हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे कैंसर रोगियों की संख्या)

वर्ष 2021 – 5096 रोगी
वर्ष 2022 – 6533 रोगी
वर्ष 2023- 7121 रोगी

एम्स की स्थिति
वर्ष 2023 – 41 हजार 323 रोगी

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