25 मासूमों की मौत… कब थमेगा बैगा बचपन पर मंडराता मौत का साया?
25 Innocent Children Dead… When Will the Shadow of Death Hanging Over Baiga Children Finally End?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले के बैहर अनुविभाग के बिरसा तहसील में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले 24 बच्चों की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था, वहीं अब एक और 4 वर्षीय बच्ची की मौत सामने आने के बाद मृत बच्चों का आंकड़ा 25 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि बिरसा तहसील की ग्राम पंचायत घुम्मुर के अंतर्गत आने वाले मुरकुटा गांव निवासी मुंचु धुर्वे, जाति बैगा की 4 वर्षीय बेटी रामप्यारी की शनिवार सुबह मौत हो गई। परिजनों के अनुसार बच्ची को पिछले 3-4 दिनों से तेज बुखार था। अचानक हुई इस मौत से परिवार में मातम पसरा है और क्षेत्र के ग्रामीणों में एक बार फिर भय और चिंता का माहौल है।
24 के बाद 25वां मासूम भी चला गया, गांवों में बढ़ी चिंता
बैगा बहुल बिरसा क्षेत्र में लगातार बच्चों की मौतें अब गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रही हैं। एक के बाद एक सामने आ रही मौतों ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके बच्चे भी बुखार और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।
रामप्यारी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभावित गांवों में बीमार बच्चों की समय पर पहचान, जांच और उपचार की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि किसी बच्चे को लगातार तेज बुखार है तो उसे तत्काल चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक जांच उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
हर मौत के पीछे सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार का उजड़ता हुआ भविष्य है। इसलिए अब जरूरत आंकड़े गिनने से ज्यादा मौतों के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच की है।
मलेरिया और मीजल्स के प्रकोप की बात, जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
जानकारी के अनुसार बिरसा तहसील के कई गांव मीजल्स और मलेरिया के प्रकोप से प्रभावित बताए जा रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि ICMR की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। हालांकि, बीमारी के प्रकोप, प्रभावित गांवों और प्रत्येक बच्चे की मृत्यु के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों को लेकर आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार बुखार कई बीमारियों का लक्षण हो सकता है। इसलिए केवल बुखार को मृत्यु का अंतिम कारण मानना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले में चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकता है।
ऐसे में प्रभावित गांवों में व्यापक स्क्रीनिंग, मलेरिया एवं अन्य संक्रामक रोगों की जांच, टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा, पोषण स्तर का आकलन और गंभीर बच्चों के लिए तत्काल रेफरल व्यवस्था जरूरी है।
25 मौतों के बाद अब सवाल—आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?
लगातार हो रही मौतों के बीच प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती अब और बड़ी हो गई है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की नियमित मौजूदगी, घर-घर सर्वे और संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच के साथ ग्रामीणों में बीमारी के लक्षणों और समय पर अस्पताल पहुंचने को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
रामप्यारी की मौत ने एक बार फिर सिस्टम के सामने वही सवाल खड़ा किया है—क्या हर बीमार बच्चे तक समय पर डॉक्टर, जांच और इलाज पहुंच रहा है?
25 मासूमों की मौत की जानकारी किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए सिर्फ एक संख्या नहीं हो सकती। अब जरूरत है कि प्रत्येक मौत की परिस्थितियों की गंभीरता से जांच हो, बीमारी के स्रोत और कारणों की पहचान की जाए और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
रामप्यारी अब नहीं लौटेगी, लेकिन उसके बाद किसी और घर का चिराग न बुझे—यह जिम्मेदारी अब व्यवस्था की है।
Legal Disclaimer
This report is based on preliminary information and family accounts; reported disease links and causes of death require official medical investigation and confirmation by competent authorities.