MP PWD घोटाला: ₹7 करोड़ के वेतन घोटाले में CEO निलंबित, 15 आरोपी!
The MP PWD ₹7 crore salary scam has led to the suspension of the CEO and the booking of 15 employees. Investigation intensifies!
MP PWD salary scam of ₹7 crore exposed! CEO suspended, 15 employees under investigation.
MP PWD Scam: CEO Suspended in ₹7 Crore Salary Fraud, 15 Accused!
Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad.
A massive ₹7 crore salary scam has rocked the MP PWD department. CEO Dharmendra Singh Yadav has been suspended, and 15 employees are under investigation. Authorities uncovered unauthorized fund transfers between 2018-23. Police and administrative action is intensifying to hold all culprits accountable.
शिवपुरी: पीडब्ल्यूडी विभाग में हुए करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। इस मामले में पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।
गुरुवार को मिली ताजा जानकारी के अनुसार, ₹7 करोड़ वेतन घोटाले में शामिल पीडब्ल्यूडी विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी धर्मेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के आदेश संभागीय आयुक्त कार्यालय से जारी किए गए हैं। संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने यह कार्रवाई शिवपुरी के इस वेतन घोटाले से जुड़े मामले में की है।
7 करोड़ से अधिक का घोटाला, 15 कर्मचारी नामजद
जांच में पता चला है कि ₹7 करोड़ 15 लाख 75 हजार 911 रुपये का गबन किया गया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच यह घोटाला अंजाम दिया गया, जिसमें पांच बैंक खातों में अवैध रूप से राशि ट्रांसफर की गई। यह कार्रवाई कलेक्टर शिवपुरी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
इस मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग के लेखा अधिकारी, आउटसोर्स कर्मचारी सहित कुल 15 कर्मचारी नामजद आरोपी हैं।
गंभीर वित्तीय अपराध, अन्य कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज
यह घोटाला मध्य प्रदेश कोषालय संहिता 2020, वित्तीय संहिता और IF-MIS नियमों का सीधा उल्लंघन है, जो गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। निलंबन के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी धर्मेंद्र सिंह यादव को जिला कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अन्य कर्मचारियों पर भी जल्द कार्रवाई होना तय है। प्रशासन और पुलिस ने जांच तेज कर दी है, और दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
यह मामला भोपाल कोष आयुक्त कार्यालय के माध्यम से उजागर किया गया था, जिसके बाद अब इसमें प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है।