मध्य प्रदेश के 4,806 प्रकाशनों के पंजीकरण रद्द, आखिर क्या हैं कारण?
4,806 Publications Deregistered in Madhya Pradesh: What Are the Reasons Behind the Move?

MP संवाद समाचार | भोपाल
विशेष संवाददाता हरिशंकर पाराशर.
नई दिल्ली/भोपाल। देशभर में 88,315 पत्र-पत्रिकाओं के पंजीकरण रद्द होने और इनमें मध्य प्रदेश के 4,806 प्रकाशनों के शामिल होने से प्रिंट मीडिया की नियामकीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 11 मार्च 2026 को लोकसभा में दिए गए जवाब में ये आंकड़े प्रस्तुत किए थे।
आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 12,403, उत्तर प्रदेश में 11,987 और दिल्ली में 11,920 पंजीकरण रद्द किए गए। हालांकि, पंजीकरण रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि इतने ही सक्रिय समाचार-पत्र बंद हो गए। इसके पीछे के कारणों को समझने के लिए कारणवार सरकारी आंकड़े जरूरी हैं।
डिजिटल सुधार के साथ जवाबदेही भी जरूरी
प्रेस एवं आवधिक प्रकाशन अधिनियम, 2023 को 1 मार्च 2024 से लागू किया गया। इसके तहत पंजीकरण प्रक्रिया को प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया गया। सरकार के अनुसार, पुराने कानून के तहत बने 1.5 लाख से अधिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया गया।
डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता और प्रक्रिया में सुधार संभव है, लेकिन सवाल यह है कि पंजीकरण रद्द होने के कारण कितने प्रकाशकों को स्पष्ट रूप से बताए गए? क्या प्रभावित प्रकाशकों को आदेश देखने, त्रुटि सुधारने और लागू नियमों के तहत अपील करने की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है?
छोटे प्रकाशकों के सामने चुनौतियां
स्थानीय समाचार-पत्र सीमित संसाधनों में ग्रामीण समस्याओं, पंचायतों और जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्रक्रियाओं, दस्तावेजों और वार्षिक विवरण से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सहायता व्यवस्था जरूरी है।
डाक वितरण के नियमों में भी अलग-अलग श्रेणियों और पात्रता के आधार पर शर्तें लागू होती हैं। इसलिए सभी प्रकाशनों पर समान शुल्क या नियम लागू होने का दावा करना उचित नहीं होगा। डाक विभाग को पात्रता, दरों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध करानी चाहिए।
सरकार से पांच अहम सवाल
प्रकाशनों के पंजीकरण रद्द होने के कारणवार आंकड़े कब सार्वजनिक होंगे? मध्य प्रदेश के प्रभावित प्रकाशनों की सूची कहां मिलेगी? तकनीकी त्रुटियों के सुधार और अपील की प्रक्रिया क्या है? छोटे प्रकाशकों को पोर्टल पर कितनी सहायता मिल रही है? डाक नियमों की जानकारी और स्पष्टता कैसे बढ़ाई जाएगी?
निष्कर्ष: नियमों का पालन और रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण जरूरी है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। सरकार और संबंधित विभागों को कार्रवाई के कारण, आदेशों और सुधार की प्रक्रिया की जानकारी आसानी से उपलब्ध करानी चाहिए।
स्रोत: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, PIB, PRGI और भारतीय डाक विभाग।
Legal Disclaimer: This article is intended for public information and editorial discussion. Registration cancellation figures do not establish that the same number of active publications have shut down. No allegation of wrongdoing is made against any individual or authority. Readers should verify current rules and official orders with the relevant authorities. This article does not constitute legal advice.