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ड्रोन सर्वे में निर्माण, NGT सख्त! शाहपुरा झील के Buffer Zone में अब क्या होगा?

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Construction Found in Drone Survey, NGT Gets Tough! What Happens Next in Shahpura Lake’s Buffer Zone?

शाहपुरा झील के Buffer Zone में ड्रोन सर्वे में मिले निर्माण
शाहपुरा झील के Buffer Zone को लेकर NGT सख्त, ड्रोन सर्वे में मिले निर्माण।

MP संवाद समाचार, भोपाल। विशेष संवाददाता ऋचा तिवारी.

भोपाल की शाहपुरा झील के संरक्षण और उसके आसपास कथित अतिक्रमण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने प्रशासनिक तंत्र को कड़ा संदेश दिया है। झील के Full Tank Level (FTL) और Buffer Zone के सीमांकन में हो रही देरी तथा अलग-अलग विभागों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने पर ट्रिब्यूनल ने नाराजगी जताई है। NGT ने SDM कोलार, जल संसाधन विभाग (WRD) और भोपाल नगर निगम (BMC) को आपसी समन्वय से 10 दिन के भीतर FTL और Buffer Zone का संयुक्त सीमांकन पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

विभागों की ‘जिम्मेदारी की गेंद’ पर NGT नाराज

मामले की सुनवाई के दौरान NGT ने स्पष्ट किया कि अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले को लंबित नहीं रख सकते। ट्रिब्यूनल ने SDM कोलार के सुनवाई में पर्याप्त जानकारी और तैयारी के बिना उपस्थित होने पर भी नाराजगी जताई तथा भविष्य में पूरे तथ्यों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया।

मामला Nitin Saxena बनाम MP State Wetland Authority एवं अन्य से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गठित समिति के साथ समन्वय कर सीमांकन की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा किया जाए।

ड्रोन सर्वे में मिले निर्माण, अब अतिक्रमण पर नजर

मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार 24 जुलाई 2026 को शाहपुरा झील के कैचमेंट क्षेत्र का ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग कराई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें स्थायी और अस्थायी निर्माण चिन्हित किए गए हैं।

वहीं, दूसरी ओर एक पूर्व निरीक्षण रिपोर्ट में 2017-18 के बाद झील के आसपास नए अतिक्रमण नहीं मिलने की बात कही गई थी। इन अलग-अलग रिपोर्टों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए NGT ने पहले FTL और Buffer Zone का संयुक्त सीमांकन कराने को कहा है।

शाहपुरा झील को वेटलैंड के रूप में मैप किए जाने के कारण उसके संरक्षण से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से झील में बिना उपचारित गंदा पानी पहुंचने और Buffer Zone में कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया गया।

10 दिन बाद क्या होगा? 30 अक्टूबर को देना होगा जवाब

NGT के निर्देश के मुताबिक FTL और Buffer Zone का सीमांकन पूरा होने के बाद झील के कैचमेंट और 50 मीटर Buffer क्षेत्र में आने वाले अवैध अथवा अस्थायी निर्माणों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी है।

अब असली सवाल यह है कि क्या 10 दिन की समयसीमा में विभाग संयुक्त सीमांकन पूरा कर पाएंगे? और यदि ड्रोन सर्वे में चिन्हित निर्माण वास्तव में प्रतिबंधित क्षेत्र में पाए जाते हैं, तो क्या प्रशासन उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेगा?

NGT ने अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। उस समय संबंधित अधिकारियों को अब तक की कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति सामने रखनी होगी।

बड़ा सवाल

शाहपुरा झील के मामले में अब सिर्फ सीमांकन का सवाल नहीं है। सवाल यह भी है कि जब झील के आसपास संरक्षण और Buffer Zone से जुड़े नियम मौजूद हैं, तो उनके पालन की निगरानी अब तक कितनी प्रभावी रही?

NGT की सख्ती के बाद प्रशासन के सामने अब समयसीमा भी है और जवाबदेही भी।

Legal Disclaimer:
This report is based on information available in public reports and proceedings before the National Green Tribunal. Allegations regarding encroachments or environmental violations are reported as claims and should not be treated as established facts unless confirmed by the competent authority or court. No individual or institution is declared guilty or liable on the basis of this report.

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