मध्यप्रदेश में ₹25,888 करोड़ सिर्फ ब्याज में: क्या बचेगा स्कूल, अस्पताल और सड़क के लिए?
₹25,888 Crore Just on Interest in Madhya Pradesh: What Will Be Left for Schools, Hospitals and Roads?
MP संवाद समाचार, भोपाल।
विशेष संवाददाता: हरिशंकर पाराशर, भोपाल।
भोपाल। विकास के नाम पर उधारी का सिलसिला जारी है, पर सवाल अब यह है कि पैसा गया कहां और चुकाएगा कौन? CAG की 2024-25 की राज्य वित्त रिपोर्ट, जो 22 जुलाई 2026 को सदन में रखी गई, मध्यप्रदेश की वित्तीय सेहत पर गंभीर चेतावनी देती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कुल देनदारियां ₹4,66,027 करोड़ तक पहुंच गईं। यह सिर्फ बाज़ार का कर्ज नहीं, बल्कि सभी सरकारी देनदारियों का जोड़ है।
पांच साल में 2.35 लाख करोड़ की छलांग
2019-20 में कुल देनदारियां ₹2,30,572 करोड़ थीं। यानी पांच साल में करीब ₹2.35 लाख करोड़ की बढ़ोतरी। CAG के अनुसार पिछले तीन वर्षों में कर्ज अर्थव्यवस्था की रफ्तार से तेज़ बढ़ा है, जिसे भविष्य की ऋण स्थिरता के लिए शुरुआती चेतावनी माना गया है। प्राथमिक शेष घाटे में है, और राज्य को ब्याज के दबाव समेत अपनी जरूरतों के लिए लगातार उधारी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उधारी का 29% पुराने कर्ज में, ब्याज 25,888 करोड़
रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 की कुल उधारी का 29.43 प्रतिशत पुराने कर्ज की अदायगी में गया, यानी विकास के लिए कम पैसा बचा। उसी साल ब्याज पर ₹25,887.86 करोड़ खर्च हुए, जबकि 2026-27 के बजट में करीब ₹33,735 करोड़ का प्रावधान है। सब्सिडी भी ₹23,320 करोड़ (114 प्रतिशत) बढ़ी। सवाल सीधा है: जब हर साल हजारों करोड़ ब्याज में जाएंगे, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और सड़क के लिए क्या बचेगा?
ऑफ-बजट उधारी: छिपा हुआ बोझ?
राज्य ने ₹3,468.34 करोड़ की ऑफ-बजट उधारी बताई, पर CAG के ऑडिट में PSU और प्राधिकरणों के जरिए अतिरिक्त ₹1,630.84 करोड़ की उधारी मिली, जिसमें बिजली वितरण कंपनियां भी शामिल हैं। जब कर्ज बजट के बाहर उठेगा, तो विधानसभा और जनता को हिसाब कैसे मिलेगा?
कर्ज अपने आप में बुरा नहीं, अगर उससे परिसंपत्तियां बनें। असली सवाल यह है कि आज की उधारी आने वाली पीढ़ियों के लिए संपत्ति बन रही है, या सिर्फ आज का खर्च चलाने का रास्ता।
स्रोत: CAG की राज्य वित्त रिपोर्ट 2024-25, मध्यप्रदेश बजट 2026-27।
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