सरकारी चावल कांड: 20वीं गिरफ्तारी, कुमार कावरे जेल में… अब SIT के रडार पर कौन?
Government Rice Scam: 20th Arrest, Kumar Kawre Sent to Jail… Who Is Next on the SIT’s Radar?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए राजकुमार उर्फ कुमार कावरे को वारासिवनी पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
पुलिस के अनुसार कुमार कावरे की गिरफ्तारी सरकारी चावल की कथित हेराफेरी और उसके परिवहन से जुड़े मामले की जांच के दौरान हुई है। कुमार कावरे की हर्श राइस मिल, टेकाड़ी में स्वामित्व/भागीदारी होने की जानकारी पुलिस जांच में सामने आने की बात कही गई है। वह पूर्व मंत्री एवं भाजपा के जिला अध्यक्ष रामकिशोर नानू कावरे के बड़े भाई बताए जाते हैं।
20वीं गिरफ्तारी से बढ़े सवाल, राइस मिलर्स तक पहुंची जांच
इस मामले में पुलिस की ओर से यह 20वीं गिरफ्तारी बताई जा रही है। इससे पहले हर्श राइस मिल से जुड़े बताए जा रहे विनोद शर्मा, अविनाश कावरे और गोपाल ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस के अनुसार सरकारी चावल के परिवहन में इस्तेमाल किए गए 28 ट्रक भी जब्त किए जा चुके हैं। पूछताछ के दौरान कुछ अन्य राइस मिलर्स के नाम सामने आने की बात कही गई है। इनमें से कुछ के फरार होने और पुलिस द्वारा उनकी तलाश किए जाने की जानकारी दी गई है।
अब सवाल यह है कि सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का नेटवर्क आखिर कितने मिलर्स और कारोबारियों तक फैला हुआ है और जांच एजेंसी इसकी पूरी कड़ी तक कब पहुंचेगी?
FCI से एथेनॉल प्लांट तक जाना था चावल, रास्ते में कथित बिक्री का आरोप
जांच के अनुसार, AVJ Agrico, छिंदवाड़ा द्वारा एथेनॉल निर्माण के लिए FCI के गोदामों से छिंदवाड़ा ले जाने के उद्देश्य से चावल लोड कराया गया था। पुलिस जांच में आरोप है कि निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय चावल को कथित रूप से वारासिवनी, बालाघाट और गोंदिया क्षेत्र के राइस मिलर्स को बेच दिया गया।
यही बिंदु इस पूरे मामले को महज परिवहन की अनियमितता से आगे ले जाकर संभावित सप्लाई चेन और लाभार्थियों की भूमिका की जांच का विषय बनाता है। हालांकि, किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, यह जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया में ही निर्धारित होगा।
SIT की जांच में अब अगली कड़ी कौन?
मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य मिश्रा द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी SIT जांच कर रहा है। लगातार गिरफ्तारियों और ट्रकों की जब्ती के बीच अब जांच की दिशा उन लोगों तक पहुंचने की है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर सरकारी चावल निर्धारित गंतव्य से अलग जगह पहुंचा।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर चावल एथेनॉल निर्माण के लिए FCI से भेजा गया था, तो वह रास्ते में कथित तौर पर दूसरे कारोबारियों तक कैसे पहुंचा? परिवहन, खरीद-बिक्री और भंडारण की पूरी श्रृंखला में किसकी क्या भूमिका थी?
SIT की जांच से इन सवालों के जवाब सामने आने का इंतजार है।
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