ग्वालियर में सड़क या ‘गड्ढों की मरम्मत’? हाईकोर्ट ने पूछा—मलबे पर बिटुमिन की परत क्यों?
Roads in Gwalior or Just ‘Pothole Repairs’? High Court Asks—Why Was Bitumen Layered Over Debris?

Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, ग्वालियर/भोपाल। ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में सड़क निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया से जुड़े कई गंभीर तकनीकी सवाल सामने आए हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर की गई जांच में कुछ सड़कों से लिए गए नमूनों में बिटुमिन कंटेंट, ग्रेडिंग, घनत्व और बाइंडर कंटेंट जैसे गुणवत्ता मानकों में कमियां सामने आने की रिपोर्ट है। इसके साथ ही DPR में दर्ज कुछ टेस्ट रिपोर्ट, उनके मूल रिकॉर्ड और सैंपल की तारीखों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
सैंपलों में गुणवत्ता संबंधी कमियां, कोर्ट में रखी गई जांच रिपोर्ट
18 सितंबर की सुनवाई में कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक की सड़क से लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी गई। रिपोर्ट के अनुसार कई नमूनों में बिटुमिन कंटेंट निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। कुछ नमूनों में घनत्व, बाइंडर कंटेंट और ग्रेडिंग से संबंधित कमियां भी दर्ज की गईं।
हालांकि रिपोर्ट में सभी परीक्षणों में एक समान विफलता नहीं बताई गई है। कुछ नमूने अन्य तकनीकी परीक्षणों में पास भी हुए। इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पूरे सड़क मार्ग को एक साथ “फेल” घोषित करने के बजाय यह कहना अधिक सटीक है कि अलग-अलग नमूनों और गुणवत्ता मानकों में कमियां सामने आई हैं।
इससे पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर तीन अन्य प्रमुख सड़कों से लिए गए नमूनों की जांच में भी गुणवत्ता मानकों से संबंधित कमियां सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
DPR की टेस्ट रिपोर्ट और तारीखों ने खड़े किए नए सवाल
मामला केवल सड़क की सामग्री की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहा। सुनवाई के दौरान DPR में शामिल टेस्ट रिपोर्ट के मूल रिकॉर्ड और रिपोर्ट की तारीखों को लेकर भी सवाल सामने आए।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ टेस्ट रिपोर्ट सरकारी प्रयोगशाला के बजाय राजनंदिनी एंटरप्राइजेज एंड कंसल्टेंसी से संबंधित थीं। कुछ रिपोर्टों में सैंपल सड़क के किस स्थान से लिया गया, इसकी स्पष्ट लोकेशन भी दर्ज नहीं थी।
एक और महत्वपूर्ण बिंदु DBM और BC के सैंपल से संबंधित तारीखों का है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक सैंपल 10 जुलाई 2024 को लिए जाने और उनकी टेस्ट रिपोर्ट 11 जुलाई को तैयार होने का उल्लेख है, जबकि संबंधित जॉब मिक्स डिजाइन की तारीख 16 सितंबर 2024 दर्ज है। हाईकोर्ट ने संबंधित मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा जांच में एक सड़क की पुरानी Measurement Book (MB) उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम ने इस संबंध में कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं और संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि में मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गड्ढों की मरम्मत पर भी हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
सड़क निर्माण के बाद गड्ढों की मरम्मत के तरीके को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम के मरम्मत संबंधी अनुबंध में गड्ढों की मरम्मत के लिए तकनीकी प्रक्रिया और समयसीमा निर्धारित है।
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत तस्वीरों में सैंपल लेने के बाद बने गड्ढों को भरने के दौरान मलबे के ऊपर बिटुमिन की पतली परत दिखाई देने की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से जवाब मांगा कि यदि तकनीकी शर्तों के अनुसार ढीली सामग्री और मलबा हटाना जरूरी है, तो गड्ढों में मलबा भरकर उसके ऊपर बिटुमिन की परत डालने के लिए किस नियम या स्पेसिफिकेशन का इस्तेमाल किया गया। संबंधित स्पेसिफिकेशन भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित थी, जिसमें शेष सैंपलों की रिपोर्ट और नगर निगम कमिश्नर का शपथपत्र सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई थी। इसी बीच 21 सितंबर को ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट द्वारा अधिकारियों के साथ शहर की सड़कों और मरम्मत व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की भी सूचना है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि हाईकोर्ट के समक्ष पेश होने वाली आगे की रिपोर्टों में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, DPR में दर्ज दस्तावेजों और मरम्मत प्रक्रिया को लेकर क्या स्थिति सामने आती है तथा संबंधित विभाग इस पर क्या जवाब देता है।
Legal Disclaimer: This report is based on court proceedings and published reports. Alleged irregularities remain subject to official inquiry and judicial determination.