लाइट नहीं थी, समय नहीं था, खतरा बड़ा था… बालाघाट में डॉक्टरों ने कैसे बचाई बैगा मां और नवजात की जान?
No Light, No Time, High Risk… How Doctors in Balaghat Saved the Lives of a Baiga Mother and Her Newborn?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। कभी-कभी चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कठिन परिस्थितियों में समय पर लिया गया निर्णय, चिकित्सकों का अनुभव और पूरी टीम का समन्वय किसी परिवार के लिए जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाता है। बालाघाट जिला चिकित्सालय में ऐसा ही एक चुनौतीपूर्ण मामला सामने आया, जहां गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से जूझ रही एक बैगा महिला और उसके नवजात शिशु की जान बचाने के लिए चिकित्सकों की टीम ने जिला अस्पताल में ही जोखिमपूर्ण ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 वर्षीय शौकरिन, पत्नी रूपचंद बैगा, निवासी बैंगाटोला सोनगुड्डा, तहसील बिरसा, को 20 सितंबर 2026 को प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय बालाघाट में भर्ती कराया गया था। महिला की स्थिति गंभीर बताई गई। प्रसव समय से पहले हो रहा था और गर्भस्थ शिशु ट्रांसवर्स लाई में था। इसके अलावा एब्डॉमिनल एब्रप्शन, नाल का गले में फंसना, फाल्सीपेरम मलेरिया पॉजिटिव होना, अत्यधिक रक्त की कमी और लगातार रक्तस्राव जैसी जटिलताएं भी मौजूद थीं।
मेडिकल कॉलेज रेफर करने के बजाय जिला अस्पताल में ऑपरेशन का निर्णय
ड्यूटी पर मौजूद डॉ. स्वाति मेश्राम ने मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन को दी। निश्चेतना से जुड़ी जटिलताओं के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था और मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर करने की स्थिति बन रही थी।
बताया गया कि महिला दूरस्थ बैगा क्षेत्र से आई थी और उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल दूसरे अस्पताल तक पहुंचाना जोखिमपूर्ण हो सकता था। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से जिला अस्पताल में ही ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया।
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने वरिष्ठ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मेश्राम से उनके अनुभव के आधार पर इस चुनौतीपूर्ण केस को जिला अस्पताल में ही संभालने का आग्रह किया। चिकित्सकीय जोखिमों का आकलन करने के बाद टीम ने ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
ओटी में लाइट की समस्या, जनरेटर से तत्काल की गई व्यवस्था
ऑपरेशन के दौरान एक और चुनौती सामने आई। बताया गया कि ऑपरेशन थिएटर में पर्याप्त लाइट की व्यवस्था नहीं थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए समय गंवाए बिना जनरेटर के माध्यम से दूसरी ओटी से इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था की गई।
महिला की स्थिति को देखते हुए चार यूनिट रक्त की व्यवस्था की गई। इसके बाद चिकित्सकों और ओटी स्टाफ की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। लगभग 45 मिनट तक चले ऑपरेशन के बाद नवजात बालक का सुरक्षित जन्म हुआ।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सकों और ओटी स्टाफ ने आपसी समन्वय के साथ ऑपरेशन पूरा किया। ऑपरेशन सफल होने के बाद परिजनों और चिकित्सा दल ने राहत की सांस ली।
मां की हालत स्थिर, नवजात एसएनसीयू में भर्ती
फिलहाल मां और नवजात दोनों की स्थिति ठीक बताई गई है। नवजात का वजन कम होने के कारण उसे विशेष निगरानी के लिए एसएनसीयू में भर्ती किया गया है। वहां उसे ऑक्सीजन सपोर्ट और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में भूमिका निभाने वाली डॉ. स्वाति मेश्राम, डॉ. सोनाली राउतकर, ओटी सिस्टर पूजा, एसएनसीयू स्टाफ सुप्रिया और वरिष्ठ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मेश्राम के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दूरस्थ बैगा अंचल से गंभीर स्थिति में पहुंची महिला को जिला चिकित्सालय में तत्काल उपचार मिलना और जटिल परिस्थितियों के बीच सफल ऑपरेशन के बाद मां एवं नवजात का सुरक्षित रहना चिकित्सा दल के समन्वित प्रयास का उदाहरण है। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि गंभीर मरीजों के लिए समय पर निर्णय, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
Legal Disclaimer: This report is based on information provided to MP Samwad News. Medical details and outcomes should be independently verified with the concerned hospital and treating doctors.