बालाघाट-सागर ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें? RSS के भीतर भी उठे सवाल.
Have Balaghat and Sagar Increased the Government’s Troubles? Questions Raised Within the RSS Too.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्यप्रदेश में बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और सागर में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब केवल प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं दिख रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं को लेकर RSS से जुड़े संगठनों में भी असंतोष सामने आया है। दावा है कि इन संगठनों ने संबंधित घटनाओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचाई है।
बालाघाट में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत तथा सागर में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों ने सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक निगरानी और जमीनी स्तर पर शासन की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि दोनों घटनाओं का असर मुख्य रूप से वंचित और कमजोर सामाजिक वर्गों पर पड़ा है।
बालाघाट पर वनवासी कल्याण परिषद की रिपोर्ट से उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, वनवासी कल्याण परिषद ने बालाघाट की स्थिति को लेकर RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी। इसमें कथित तौर पर बच्चों की मौतों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराते हुए आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी कामकाज और समन्वय पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संघ से जुड़े पदाधिकारी प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। कथित तौर पर यह महसूस किया जा रहा है कि आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त समन्वय नहीं हो पाया।
बालाघाट में बीमारी, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण व्यवस्था, स्वच्छ पानी और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब इन मुद्दों पर संघ परिवार से जुड़े संगठनों की रिपोर्ट सामने आने की बात सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
सागर शराबकांड में पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल?
सागर की कथित जहरीली शराब त्रासदी को लेकर भी RSS से जुड़े संगठनों की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़े स्तर पर कथित अवैध शराब निर्माण और वितरण बिना स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार के सहयोग के संभव नहीं माना जा सकता। इसमें पुलिस की कथित भूमिका का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम जिम्मेदारी जांच का विषय है। यदि अवैध शराब का नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय रहा, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई और कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
अब सरकार के साथ समन्वय बैठक में उठेंगे बड़े सवाल?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सागर में मृतकों में बड़ी संख्या SC और OBC समुदायों से जुड़े लोगों की थी, जबकि बालाघाट में प्रभावित परिवार मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय से हैं। यही वजह है कि इन घटनाओं को लेकर सामाजिक स्तर पर भी गंभीर चिंता जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, RSS से जुड़े संगठन सागर में शराब कारोबारियों को कथित राजनीतिक संरक्षण दिए जाने के आरोपों से भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। वहीं प्रदेश के कई शहरों में प्रतिबंध के बावजूद शराब की अवैध बिक्री के सवाल को भी गंभीर माना जा रहा है।
अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये मुद्दे RSS की आगामी समन्वय बैठकों में प्रमुखता से उठते हैं और क्या संगठन इन मामलों को सरकार के सामने सीधे रखता है।
सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि बालाघाट और सागर में क्या हुआ। बड़ा सवाल यह है कि यदि संघ से जुड़े संगठनों की रिपोर्टों में भी प्रशासनिक विफलता, भ्रष्टाचार और निगरानी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार इन शिकायतों पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है।
Legal Disclaimer: This report is based on media reports and alleged findings attributed to RSS-affiliated organisations; all allegations remain subject to independent verification and official or judicial determination.
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