तबादले से थमेगा मौत का सिलसिला? बैगा बच्चों की मौत के बाद सरकार ने बदले अधिकारी.
Will Transfers Stop the Deaths? Government Changes Officials After Deaths of Baiga Children.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट, 22 अगस्त 2026। बैगा जनजाति के बच्चों की मौत के बाद आखिरकार सरकार की नजर दूरस्थ बिरसा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहुंची। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्राम मछुरदा पहुंचकर बीमारी से प्रभावित बैगा परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, पोषण, टीकाकरण और अन्य समस्याओं की जानकारी ली तथा सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
लेकिन इस दौरे ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—जब बीमारी और मौतें सामने आ गईं, तभी प्रशासनिक तंत्र क्यों जागा? सरकार ने जिला टीकाकरण अधिकारी को बदलने और जिला मलेरिया अधिकारी को हटाने की जानकारी दी है। अब जांच के बाद लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।
अधिकारी बदले, अब जवाबदेही की बारी
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि बैगा बच्चों की मृत्यु के मामले की जांच होगी और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बालाघाट के जिला मलेरिया अधिकारी मनीषा जुनेजा को जबलपुर स्थानांतरित किया गया है और ब्रजेश पटेल को जिला मलेरिया अधिकारी बनाया गया है। वहीं जिला टीकाकरण अधिकारी का प्रभार डॉ. परितोष शुक्ला को सौंपा गया है।
इसके अलावा सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप को पद से हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन प्रशासनिक बदलावों से आगे बढ़कर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में बीमारी के कारण, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, निगरानी व्यवस्था और संभावित प्रशासनिक लापरवाही की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
38 गांवों में दवा छिड़काव, घर-घर सर्वे का दावा
सरकार के अनुसार बिरसा क्षेत्र के 38 गांवों में मलेरिया से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। घर-घर सर्वे कर बीमार लोगों की जांच और उपचार किया जा रहा है। प्रभावित गांवों में विशेष टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने बैगा परिवारों से बच्चों का टीकाकरण कराने, स्वच्छता अपनाने और पौष्टिक आहार पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मछुरदा के उप स्वास्थ्य केंद्र में एक एएनएम की व्यवस्था की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
सरकार ने शिक्षा पर भी जोर दिया और अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की अपील की। साथ ही दूरस्थ क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग का मेनपावर बढ़ाने और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की बात कही गई है।
बैगा इलाकों में सिर्फ दौरा नहीं, स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए
बैगा परिवारों की समस्या केवल एक बीमारी या एक अभियान तक सीमित नहीं है। दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती, पोषण, टीकाकरण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा सुविधा—इन सभी मोर्चों पर लगातार निगरानी की जरूरत है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बैगा बच्चों के पोषण को लेकर भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। अब उम्मीद यही है कि यह मामला सिर्फ अधिकारियों के तबादले और कुछ दिनों के विशेष अभियान तक सीमित न रहे।
बैगा बच्चों की मौत ने व्यवस्था के सामने आईना रख दिया है। अब असली परीक्षा जांच की निष्पक्षता, जिम्मेदारी तय करने और मछुरदा जैसे दूरस्थ गांवों में स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था पहुंचाने की है।
Legal Disclaimer: This report is based on available official statements and information; allegations or administrative lapses remain subject to verification and competent authorities’ inquiry.