AI लिखेगा खबर, तो Fact-Check कौन करेगा? पत्रकारिता के भरोसे पर बड़ा सवाल.
If AI Writes the News, Who Will Fact-Check It? A Big Question Mark Over Trust in Journalism.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने खबर लिखने और उसे प्रकाशित करने की प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। मध्य प्रदेश के जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की सलाहकार समिति के सदस्य राज कुमार लुनिया ने AI की मदद से तैयार किए जा रहे न्यूजपेपरों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि तकनीक का इस्तेमाल यदि बिना तथ्य-जांच और संपादकीय निगरानी के किया गया, तो इसका सीधा असर पाठकों के विश्वास पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आज AI टूल्स की मदद से खबरों और समाचार-पत्र जैसी सामग्री तैयार की जा रही है। यदि ऐसी सामग्री में किसी स्तर पर फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी या अपुष्ट दावे शामिल हो जाएं, तो इसका नुकसान केवल संबंधित प्रकाशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मध्यम समाचार पत्रों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
AI से खबरें आसान, लेकिन Fact-Check की जिम्मेदारी किसकी?
AI कुछ ही समय में समाचार का ड्राफ्ट तैयार कर सकता है, लेकिन किसी खबर की वास्तविकता की पुष्टि करना, संबंधित पक्षों का बयान लेना, दस्तावेजों की जांच करना और तथ्यात्मक त्रुटियों को रोकना पत्रकारिता की मूल जिम्मेदारी है।
लुनिया ने चिंता जताई कि यदि AI से तैयार सामग्री को बिना पर्याप्त संपादकीय जांच के अखबार के रूप में प्रकाशित किया गया और उसमें फेक न्यूज शामिल हो गई, तो आम पाठक के लिए वास्तविक और भ्रामक खबर के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है—क्या AI की मदद से तैयार हर खबर को प्रकाशित करने से पहले अनिवार्य मानवीय Fact-Check और Editorial Review नहीं होना चाहिए?
तकनीक को रोकना शायद समाधान नहीं है, लेकिन उसके इस्तेमाल के साथ जवाबदेही तय करना जरूरी है।
बड़े कॉरपोरेट मीडिया बनाम छोटे अखबार—किसका बचेगा भरोसा?
लुनिया ने चेतावनी दी कि यदि AI आधारित प्रकाशनों में फेक न्यूज का चलन बढ़ा और पाठकों का भरोसा कमजोर हुआ, तो इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम समाचार पत्रों पर पड़ सकता है।
उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पाठक केवल बड़े कॉरपोरेट मीडिया समूहों को ही विश्वसनीय मानने लग सकते हैं। इससे स्थानीय और मध्यम समाचार पत्रों की पाठक संख्या और प्रभाव प्रभावित हो सकता है।
इसका असर केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे और मध्यम समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों, रिपोर्टरों, ऑपरेटरों और अन्य कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए बहस सिर्फ AI बनाम पत्रकारिता की नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या तकनीकी बदलाव के बीच स्थानीय और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए समान अवसर और भरोसा बचा रहेगा?
RNI नहीं, अब PRGI—AI अखबारों पर कानून और जवाबदेही का सवाल
लुनिया ने बिना RNI नंबर वाले AI निर्मित अखबारों का बहिष्कार करने की अपील की है। हालांकि, यहां वर्तमान कानूनी व्यवस्था की सही शब्दावली समझना भी जरूरी है।
Press and Registration of Periodicals Act, 2023 लागू होने के बाद पुराने RNI ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है और Registrar of Newspapers for India (RNI) का नाम Press Registrar General of India (PRGI) किया गया है।
इसलिए आज किसी periodical/newspaper की registration स्थिति पर बात करते समय PRGI Certificate of Registration की स्थिति देखना अधिक सटीक है।
लेकिन असली मुद्दा इससे भी बड़ा है—AI से सामग्री तैयार करना अपने आप में पत्रकारिता की विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। खबर AI से लिखी गई हो या पत्रकार ने लिखी हो, अंतिम प्रकाशित सामग्री की तथ्यात्मक शुद्धता और संपादकीय जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
यदि AI का इस्तेमाल केवल भाषा, ड्राफ्टिंग, अनुवाद या डेटा व्यवस्थित करने के लिए किया जाए और अंतिम सामग्री का मानव स्तर पर सत्यापन हो, तो तकनीक पत्रकारिता के लिए उपयोगी साधन बन सकती है।
लेकिन यदि AI को बिना Fact-Check के ‘न्यूज मशीन’ बना दिया गया, तो सबसे बड़ा नुकसान पाठक के भरोसे का होगा।
MP संवाद का सवाल
केंद्र सरकार और नियामक संस्थाओं के सामने अब चुनौती केवल AI को नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि AI-generated news, fact-checking, editorial accountability और registered publications के बीच स्पष्ट नियम बनाने की है।
क्योंकि अखबार की पहचान सिर्फ कागज, वेबसाइट या AI से तैयार सामग्री से नहीं होती—उसकी असली पहचान पाठक के भरोसे से होती है।
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