MP SAMVAAD LOGO 2

केन-बेतवा परियोजना की रफ्तार तेज, लेकिन विवाद और सवाल भी हुए गहरे.

0

Ken-Betwa Project Gains Momentum, but Controversies and Questions Deepen.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार | भोपाल/छतरपुर-पन्ना देश की पहली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (अनुमानित लागत लगभग 44,605 करोड़ रुपये, वर्ष 2020-21 की लागत के आधार पर) एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गई है। एक मीडिया रिपोर्ट में परियोजना से जुड़ी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के कथित उल्लंघन, पुनर्वास की धीमी प्रगति, वन क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों तथा स्थानीय आदिवासी एवं किसान समुदाय के विरोध को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

इधर, मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार परियोजना को बुंदेलखंड की जल समस्या का दीर्घकालिक समाधान बताते हुए तेजी से आगे बढ़ा रही है। वहीं कांग्रेस ने इसे पर्यावरण और आदिवासी हितों के खिलाफ बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?

यह परियोजना केन नदी के जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित करने पर आधारित है। इसके तहत दौधन बांध का निर्माण किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार परियोजना से—

  • 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
  • लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा।
  • 103 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा।
  • बुंदेलखंड के जल संकट से राहत मिलेगी।

हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि परियोजना का अधिक लाभ ऊपरी बेतवा क्षेत्र को मिलेगा, जबकि पारंपरिक सूखा प्रभावित क्षेत्रों को अपेक्षित लाभ मिलेगा या नहीं, यह स्पष्ट होना बाकी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व पर पर्यावरणीय असर को लेकर चिंता

परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के बड़े हिस्से पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार—

  • लगभग 4,141 हेक्टेयर कोर वन क्षेत्र डूब क्षेत्र में आ सकता है।
  • कुल 6,017 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी।
  • लगभग 9,000 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होने का अनुमान है।
  • लाखों पेड़ों पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बाघ, घड़ियाल, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही वन्यजीव कॉरिडोर बाधित होने की भी आशंका जताई गई है।

फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के पालन पर उठे सवाल

एक मीडिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2017 (स्टेज-1) और 2023 (स्टेज-2) की वन स्वीकृतियों से जुड़ी कई शर्तों का पूर्ण पालन अभी तक नहीं हुआ है।

रिपोर्ट में प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं—

  • क्षतिपूर्ति वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी है।
  • प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और भूमि हस्तांतरण में विलंब है।
  • प्रस्तावित पावर हाउस के स्थान को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
  • पेड़ों की गणना एवं प्रतिपूरक पौधारोपण की प्रगति पर संदेह व्यक्त किया गया है।
  • परियोजना से संबंधित कुछ पर्यावरणीय मुद्दे अभी भी न्यायिक विचाराधीन बताए गए हैं।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

7,193 परिवारों के पुनर्वास पर विवाद

परियोजना से 7,193 परिवारों के प्रभावित होने का अनुमान है।

स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों का आरोप है कि—

  • कई परिवार मुआवजा राशि से संतुष्ट नहीं हैं।
  • नए पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी है।
  • कृषि भूमि और आजीविका को लेकर असमंजस बना हुआ है।

इसी मुद्दे को लेकर वर्ष 2026 में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए।

कांग्रेस का हमला, SIT जांच की मांग

कांग्रेस नेताओं ने परियोजना को पर्यावरण और आदिवासी हितों के विरुद्ध बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

विपक्ष का आरोप है कि परियोजना में पर्यावरणीय मानकों और पुनर्वास प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

सरकार का पक्ष

मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार का कहना है कि—

  • परियोजना को सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त हैं।
  • प्रभावित परिवारों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज लागू किया गया है।
  • प्रतिपूरक वनीकरण की प्रक्रिया जारी है।
  • परियोजना बुंदेलखंड के विकास और जल सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक साबित होगी।

विशेषज्ञों की क्या है चिंता?

कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों और जल संसाधन विश्लेषकों का कहना है कि—

  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को लेकर और अध्ययन की आवश्यकता है।
  • वन्यजीव संरक्षण तथा जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभावों का स्वतंत्र मूल्यांकन होना चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में परियोजना की दीर्घकालिक उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है।

कुछ विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि बड़े जलाशयों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तथा स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर पड़ सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों, मीडिया रिपोर्टों, सरकारी दावों तथा संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। लेख में उल्लिखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि MP संवाद समाचार द्वारा नहीं की गई है। संबंधित सरकारी विभागों या एजेंसियों द्वारा यदि कोई स्पष्टीकरण, खंडन अथवा अतिरिक्त तथ्य उपलब्ध कराए जाते हैं तो उन्हें भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा। न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिए जाने वाले अंतिम निर्णय ही मान्य होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.