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FIR के बाद भी बरकरार सवाल, इथेनॉल प्लांट तक कैसे पहुंचा फोर्टिफाइड चावल?

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Questions Persist Even After an FIR: How Did Fortified Rice Reach an Ethanol Plant?

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में इथेनॉल उत्पादन के लिए कथित रूप से फोर्टिफाइड चावल के उपयोग का मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि इस मामले में 3 जून को FIR भी हो चुकी है। इसके बावजूद सवाल कायम हैं कि आखिर गरीबों के पोषण के लिए तैयार किया गया फोर्टिफाइड चावल उद्योगों तक कैसे पहुंचा?

SOP की मंशा पर उठे सवाल

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की 20 अक्टूबर 2025 की SOP में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए FCI के स्टॉक से चावल जारी करते समय “जहां तक संभव हो पुराने चावल का उपयोग किया जाए”।

इसके विपरीत आरोप है कि बालाघाट स्थित इथेनॉल इकाई को इसी वर्ष खरीदा गया फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराया गया।

फोर्टिफाइड चावल: पोषण के लिए या इथेनॉल के लिए?

फोर्टिफाइड चावल को आयरन, फोलिक एसिड और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है ताकि गरीब और कुपोषित वर्ग को बेहतर पोषण मिल सके।

ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस चावल को कुपोषण से लड़ने का हथियार बताया गया, वह इथेनॉल उत्पादन की भट्ठी तक कैसे पहुंच गया?

मामले की FIR दर्ज है.

इस पूरे मामले में वारासिवनी थाना, बालाघाट में अपराध क्रमांक 272/2026 दर्ज किया गया है। FIR में CMR चावल और उसके परिवहन/उपयोग से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख है तथा AVJ Agrico Private Limited का नाम भी जांच के दायरे में आया है।

यानी मामला केवल प्रशासनिक जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक जांच का विषय भी बन चुका है।

सबसे बड़ा सवाल: नया स्टॉक किसके आदेश पर?

अब कई सवाल जवाब मांग रहे हैं—

  • जब SOP पुराने चावल के उपयोग की बात करती है, तो नया फोर्टिफाइड चावल क्यों दिया गया?
  • क्या जारी किया गया स्टॉक वास्तव में फोर्टिफाइड था?
  • क्या यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए निर्धारित चावल था?
  • आवंटन प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
  • FIR दर्ज होने के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई?

थाली का अनाज या उद्योग का कच्चा माल?

यह मामला केवल चावल का नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों की विश्वसनीयता का भी है।

एक तरफ सरकार कुपोषण मुक्त भारत का दावा करती है, दूसरी तरफ यदि पोषण योजनाओं से जुड़ा चावल इथेनॉल उद्योग तक पहुंचता है तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

जांच और जवाबदेही की मांग

पूरे प्रकरण की जांच उच्च स्तरीय जांच SIT द्वारा कराई जा रही है यह सार्वजनिक किया जाए कि फोर्टिफाइड चावल का आवंटन किस आधार पर किया गया।

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