MP SAMVAAD LOGO 2

चावल में मिलावट का ‘सुगंध सिंडिकेट’! बालाघाट से जबलपुर तक फैला जाल?

0

The Fragrance Syndicate of Rice Adulteration! Has a Network Spread from Balaghat to Jabalpur?

MP संवाद समाचार, Special Correspondent, Jabalpur, MP Samwad News.

जबलपुर, मध्यप्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर द्वारा आयुक्त खाद्य सुरक्षा, कलेक्टर जबलपुर और कलेक्टर बालाघाट को भेजे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि रासायनिक तरीके से कृत्रिम सुगंध वाला चावल तैयार कर उसे जबलपुर सहित कई जिलों में बेचा जा रहा है।

यह मामला केवल मिलावट का नहीं, बल्कि लाखों उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।

बालाघाट की राइस मिलों में मिली केमिकल की बोतलें!

शिकायत पत्र के अनुसार अप्रैल माह में कलेक्टर बालाघाट के निर्देश पर जिले की कई राइस मिलों में आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान कथित रूप से चावल को सुगंधित बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले केमिकल की बोतलें बरामद हुईं।

जांच टीम ने “काली मूंछ” नामक सुगंधित चावल और कथित एसेंस के नमूने लिए थे। साथ ही “एडेड फ्लेवर” अंकित कुछ बोरियों को भी जब्त किया गया। नमूनों को परीक्षण के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

क्या उपभोक्ताओं को परोसा जा रहा है नकली काली मूंछ जैसा चावल?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि साधारण चावल में कृत्रिम सुगंध मिलाकर उसे महंगे और सुगंधित चावल के रूप में बाजार में उतारा जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

स्थानीय व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच भी इस कथित ‘सुगंधित चावल सिंडिकेट’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

लिवर और किडनी पर खतरे की आशंका

शिकायतकर्ता ने पत्र में उल्लेख किया है कि खाद्य सुरक्षा नियम 2011 के तहत खाद्य पदार्थों में कुछ “परमिसिबल एसेंस” की अनुमति है, लेकिन निर्धारित मात्रा से अधिक या अन्य रासायनिक पदार्थों का उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित रासायनिक फ्लेवरिंग का लगातार सेवन लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। खाद्य मिलावट को लेकर देशभर में पहले भी चिंता जताई जा चुकी है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भोपाल प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट क्या कहती है? यदि जांच में रासायनिक मिलावट की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार मिल संचालकों और कारोबारियों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल

शिकायत 24 मई 2026 को संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। लेकिन अब तक इस पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में उपभोक्ता संगठन मांग कर रहे हैं कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

जनता पूछ रही है…

  • क्या बाजार में बिक रहा हर सुगंधित चावल असली है?
  • क्या मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है?
  • आखिर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कब होगी?
  • यदि केमिकल मिला था तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.