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स्वास्थ्य विभाग खुद ‘बीमार’ — मेडिकल स्टोर्स पर अवैध वसूली, अधिकारी मौन.

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Health Department Itself ‘Sick’ — Illegal Extortion from Medical Stores, Officials Remain Silent.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में संचालित मेडिकल स्टोर्स से कथित तौर पर “मेंटेनेंस” के नाम पर 4 हजार रुपए की अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्रवाई का डर दिखाकर मेडिकल संचालकों से रकम ली जा रही है, लेकिन बदले में कोई रसीद या आधिकारिक दस्तावेज तक नहीं दिया जा रहा।

इस खुलासे के बाद जिलेभर के मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया है।

‘राशि दो, कार्रवाई से बचो’ का खेल?

सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी टीम पहले मेडिकल दुकानों का निरीक्षण करती है और फिर संचालकों को नियमों की कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। बाद में “मेंटेनेंस” के नाम पर 4 हजार रुपए की मांग की जाती है।

बताया जा रहा है कि जो दुकानदार रकम देने से इनकार करते हैं, उनकी दुकानों में खामियां निकालकर चालानी कार्रवाई की जाती है।

कई ब्लॉकों से लाखों रुपए वसूली का दावा

सूत्रों के अनुसार कटंगी, लांजी, बालाघाट, लालबर्रा, बैहर, बिरसा, वारासिवनी, मलाजखंड, लामता और परसवाड़ा समेत कई क्षेत्रों की मेडिकल दुकानों से लाखों रुपए वसूले जाने की चर्चा है।

आरोप है कि:

  • कटंगी से करीब ₹1.80 लाख
  • रामपायली और मेंढकी-डोंगरमाली से ₹1.25 लाख
  • वारासिवनी से ₹2 लाख
  • लांजी-किरनापुर से ₹3 लाख
  • बैहर और बिरसा से ₹1.5 लाख
  • परसवाड़ा से ₹2 लाख

तक वसूले जाने की जानकारी सामने आई है।

मेंटेनेंस आखिर किस चीज का?

मेडिकल स्टोर संचालकों का सवाल है कि जब लाइसेंस जारी करने के लिए पहले ही विभागीय शुल्क और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, तो आखिर “मेंटेनेंस” के नाम पर अलग से पैसे किस बात के लिए लिए जा रहे हैं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह अधिकृत शुल्क है तो उसकी रसीद क्यों नहीं दी जा रही?

CMHO को जानकारी, फिर भी कार्रवाई नहीं?

सूत्रों का दावा है कि यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के संज्ञान में है। बावजूद इसके अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

हालांकि मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी परेश उपलव ने कहा है कि उन्हें भी इस तरह की जानकारी मिली है और यदि कोई लिखित शिकायत करता है तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।

डर के कारण सामने नहीं आ रहे संचालक

बताया जा रहा है कि कई वर्षों से यह कथित वसूली जारी है, लेकिन कार्रवाई के डर से मेडिकल संचालक खुलकर शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें आशंका रहती है कि विरोध करने पर उनकी दुकान पर छापे और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

बड़ा सवाल

क्या स्वास्थ्य विभाग की आड़ में ‘मेंटेनेंस वसूली’ का खेल चल रहा है? और आखिर बिना रसीद लिए जा रहे लाखों रुपए किसकी जेब में जा रहे हैं?

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