कागजों में समाधान, सड़कों पर ट्रक — 43 साल की नाकामी पर अब सवाल!
Solutions on paper, trucks on the streets — questions raised over 43 years of failure!

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद, कटनी। शहर की सबसे बड़ी और स्थायी समस्या — भारी जाम और बेतरतीब खड़े ट्रक-ट्रेलर — को खत्म करने के लिए वर्ष 1982-83 में शुरू की गई ट्रांसपोर्ट नगर योजना आज भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है। 43 साल बाद भी प्रशासन की उदासीनता ने इस महत्वाकांक्षी योजना को मजाक बनाकर रख दिया है।
शहर के बाहर पुरैनी क्षेत्र में बसाए जाने वाले पुरैनी ट्रांसपोर्ट नगर का उद्देश्य था कि भारी वाहनों को शहर से बाहर शिफ्ट कर यातायात व्यवस्था को सुधारा जाए। लेकिन हकीकत यह है कि ट्रांसपोर्ट नगर सिर्फ बोर्ड और नक्शों तक सीमित रह गया।
वर्ष 2012 में लॉटरी के माध्यम से 266 भूखंड 30 वर्ष की लीज पर आवंटित किए गए थे। शर्त साफ थी—एक वर्ष के भीतर निर्माण कर व्यवसाय शुरू करना होगा। इसके बावजूद अधिकांश ट्रांसपोर्टरों ने न तो निर्माण कराया और न ही कारोबार शिफ्ट किया। नतीजा—शहर की सड़कों पर आज भी ट्रकों की कतारें, जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा जस का तस बना हुआ है।
अब जाकर कटनी नगर निगम ने 20 फरवरी को ऐसे 48 ट्रांसपोर्टरों को लीज निरस्तीकरण के नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने वर्षों से भूखंड खाली छोड़ रखे हैं।
नोटिस पाने वालों में एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट, उपकार ट्रांसपोर्ट, भाटिया रोड लाइंस, न्यू गुरुनानक ट्रांसपोर्ट, पटेल ट्रांसपोर्ट, राहत ट्रांसपोर्ट, राहुल ट्रांसपोर्ट, गुड़गांव ट्रांसपोर्ट, बंग रोड लाइंस, जालपा ट्रांसपोर्ट, चौरसिया रोडवेज, गीता रोडवेज, आनंद एंड कंपनी और कटनी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
नगर निगम ने साफ किया है कि 15 दिन के भीतर जवाब और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो बिना मुआवजा दिए भूखंड वापस ले लिए जाएंगे। राजस्व अधिकारी जागेश्वर पाठक के अनुसार लीज निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब 102 से अधिक ट्रांसपोर्टरों ने रजिस्ट्री करा रखी है, तो फिर इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या यह लापरवाही थी या मौन सहमति?
चार दशक तक प्रशासन की चुप्पी ने शहर को लगातार जाम, प्रदूषण और अव्यवस्था की सजा दी है। आज अचानक नोटिस जारी होना इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि ट्रांसपोर्ट नगर को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
अब शहर पूछ रहा है—
क्या यह कार्रवाई वाकई ट्रांसपोर्ट नगर को धरातल पर उतारने की शुरुआत है, या फिर एक बार फिर फाइलें बंद करने की औपचारिक कवायद?