पीएमश्री स्कूलों में ‘विकास’ नहीं, वसूली मॉडल चल रहा है!
No ‘development’ in PM SHRI schools — a collection and extortion model is running instead!

Special Correspondent, Seoni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, Seoni — सिवनी जिले के पीएमश्री स्कूलों में बच्चों के विकास के लिए आई सरकारी राशि में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। भोजन, अध्ययन सामग्री, खेल सामग्री और उपकरण खरीद के नाम पर कच्चे बिल, फर्जी वाउचर और गलत भुगतान के जरिए लाखों रुपये का गोलमाल किया गया।
जांच में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किए गए और कई मामलों में सामग्री की वास्तविक आपूर्ति तक नहीं हुई।
अब तीन स्कूलों से जुड़ी पूरी फाइल कार्रवाई के लिए Directorate of Public Instruction, Bhopal
(डीपीआई भोपाल) भेज दी गई है।
200 बच्चों का खाना, बिल 400 थालियों का!
शासकीय पीएमश्री बूढ़ेना बरघाट स्कूल में तत्कालीन प्राचार्य शरण दास मैकेंजी पर गंभीर आरोप लगे हैं।
जांच में सामने आया कि—
- 200 बच्चों के भोजन के नाम पर
- 400 थालियों का कच्चा बिल लगाकर
- करीब 80 हजार रुपये निकाल लिए गए।
इतना ही नहीं, ऐसे कई फर्जी बिल तैयार कर शासकीय राशि का गलत आहरण किया गया।
4 हजार का साउंड बॉक्स, बिल 44 हजार का!
पीएमश्री कन्या शाला, बरघाट में भी चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
यहां की प्राचार्य शरला नरेती पर आरोप है कि—
- करीब 4 हजार रुपये कीमत वाले साउंड बॉक्स का
- 44 हजार रुपये का बिल लगाकर भुगतान ले लिया गया।
जांच के दौरान संबंधित सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं मिला।
यहां भी लाखों रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि की गई है।
निजी चंदा भी सरकारी पैसे से!
शासकीय पीएमश्री खैरा पलारी स्कूल में प्राचार्य जयंती मरावी पर आरोप है कि—
- निजी चंदे जैसे कुछ खर्च भी
- सीधे सरकारी राशि से पूरे कर दिए गए।
जांच में यहां भी कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
तीनों स्कूलों की फाइल डीपीआई भोपाल रवाना
बढ़ती शिकायतों, कच्चे बिलों और फर्जी वाउचरों के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तीनों स्कूलों की गड़बड़ियों की फाइल डीपीआई भोपाल भेज दी है।
अधिकारियों का कहना है कि अब मामले की उच्च स्तर पर समीक्षा होगी और जिम्मेदार प्राचार्यों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
बच्चों के नाम पर बजट, अफसरों के हाथ में लूट
केंद्र सरकार पीएमश्री स्कूलों में हर साल बच्चों के विकास, संसाधनों और गतिविधियों के लिए लाखों रुपये भेजती है।
लेकिन सिवनी जिले में सामने आया यह मामला बता रहा है कि—
जिन पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी थी,
उन्हीं पर सरकारी धन हड़पने के आरोप लगे हैं।
बड़ा सवाल
जब—
- थाली दोगुनी दिखाई जाती है,
- साउंड बॉक्स दस गुना महंगा बताया जाता है,
- और निजी खर्च सरकारी खाते से चुकाया जाता है,
तो यह केवल लापरवाही नहीं,
शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था की सीधी विफलता है।
अब देखना यह है कि
डीपीआई भोपाल तक पहुंची फाइलें सिर्फ औपचारिकता बनेंगी या फिर सिवनी के पीएमश्री स्कूलों में हुए इस फर्जीवाड़े पर
वास्तविक और उदाहरण बनाने वाली कार्रवाई होगी।