थाने से जब्त वाहन लूट ले गए दबंग, कानून को सरेआम चुनौती.
Goons snatch a seized vehicle from the police station, openly challenging the law.

Special Correspondent, Amit Singh, Rewa, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, सिंगरौली। जिले में अवैध रेत माफिया के हौसले अब इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न कानून का डर है, न पुलिस का खौफ। ताजा मामला पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा करता है।
आरोप है कि Chitrangi Police Station परिसर में खड़े अवैध रेत से भरे वाहन को हथियारबंद दबंगों ने खुलेआम बंदूक की नोक पर छुड़ा लिया और मौके पर मौजूद पुलिस सिर्फ तमाशा देखती रह गई।
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग की टीम ने अवैध रेत से भरे एक वाहन को जब्त कर थाने लाया था। जैसे ही वाहन थाने परिसर में खड़ा किया जा रहा था, उसी समय एक गाड़ी से दर्जनों लोग मौके पर पहुंचे। हाथों में हथियार, आंखों में दबंगई और जुबान पर धमकी।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने मौके पर मौजूद वनरक्षक को बंदूक दिखाकर डराया, गाली-गलौज की और यहां तक कह दिया कि अगर विरोध किया गया तो गाड़ी से कुचल देंगे।
कुछ ही पलों में थाने का माहौल दहशत में बदल गया। इसके बाद दबंगों ने जब्त किए गए अवैध रेत से भरे वाहन को जबरन छुड़ा लिया और फरार हो गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना थाने के भीतर, पुलिस की मौजूदगी में हुई — लेकिन न कोई रोक-टोक, न कोई तत्काल कार्रवाई।
इस पूरी कार्रवाई से यह सवाल खड़ा हो गया है कि
आखिर थाने जैसी सुरक्षित जगह पर माफिया इतनी बेखौफ कैसे घुस आए?
घटना ने कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं—
- क्या पुलिस पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव था?
- क्या थाने के CCTV कैमरे चालू थे?
- क्या हमलावरों की पहचान की जा चुकी है?
- और सबसे अहम — क्या इस पूरे खेल में किसी पुलिसकर्मी की मिलीभगत थी?
जिले में अवैध रेत उत्खनन कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला सीधे कानून को चुनौती देने का है। अगर थाने से, वह भी हथियारों के दम पर, जब्त वाहन छुड़ाया जा सकता है तो यह साफ संकेत है कि रेत माफिया का नेटवर्क किस हद तक मजबूत हो चुका है।
घटना के बाद Madhya Pradesh Forest Department के वनरक्षक द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस जांच की बात कर रही है, लेकिन अब तक न कोई आधिकारिक बयान सामने आया है और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी।
थाने के भीतर हुई इस वारदात ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि जिले में अवैध रेत कारोबार अब खुलेआम सत्ता और सिस्टम को चुनौती दे रहा है।