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नंबर-1 शहर, ज़हर भरा पानी! इंदौर मॉडल पर उमंग सिंघार ने खोली पोल.

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Indore residents protest over poisoned drinking water as Umang Singhar questions Swachh City ranking

Swachh City Indore faces serious questions after deaths linked to contaminated drinking water.

Number-1 City, Poisoned Water! Umang Singhar Exposes the Indore Model.

Special Correspondent, Ram Lakhan Yadav, Indore, MP Samwad News.

इंदौर। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद देश के सबसे स्वच्छ शहर के दावे पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि जिस शहर के नलों में जहर बह रहा हो, उसे आठ बार स्वच्छता का ताज पहनाना फर्जीवाड़े के बिना संभव नहीं

इंदौर दौरे के दौरान कई प्रभावित इलाकों में पानी की गुणवत्ता की जांच करने के बाद सिंघार ने संवाददाता सम्मेलन में भाजपा सरकार के ‘स्वच्छता’ और ‘विकसित भारत’ के नारों को कागजी और झूठा करार दिया।

“अगर सीवेज पीना पड़े, तो स्वच्छता रैंकिंग किस काम की?”

नेता प्रतिपक्ष ने तीखे शब्दों में कहा—

“इंदौर आठ बार नंबर-1 बना, लेकिन अगर नागरिकों को सीवेज मिला पानी पीना पड़े, तो इस रैंकिंग का कोई मतलब नहीं। कागजों में खेल हुआ है। अधिकारी जानते हैं कि ये इनाम फर्जी दस्तावेजों के सहारे कैसे लिए गए।”

उन्होंने सवाल उठाया कि 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बजट वाले नगर निगम के बावजूद नागरिकों को पीने का साफ पानी क्यों नहीं मिल पा रहा।

मौतों के आंकड़ों में भी विरोधाभास

इंदौर प्रशासन ने दूषित पानी से छह मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि छह माह के बच्चे समेत 17 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की बात स्वीकार की थी। इन दावों के बीच सरकार ने 18 पीड़ित परिवारों को मुआवजा बांट दिया, लेकिन सच्चाई अब भी धुंध में है

“यह एक इलाके की नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता है”

उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा के अलावा मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया सहित कई इलाकों का दौरा किया। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में नलों से दुर्गंधयुक्त और सीवेज मिला पानी आ रहा है।

उन्होंने कहा—

“यह सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि इंदौर के शहरी प्रशासन की पूरी प्रणाली की नाकामी है।”

“अवार्ड लोगों को जिंदा नहीं रखते, साफ पानी रखता है”

मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे संबोधित करते हुए सिंघार ने कहा कि स्वच्छता के पुरस्कारों से लोग जिंदा नहीं रहते, बल्कि जिंदा रहने के लिए साफ पानी चाहिए—और इसमें सरकार पूरी तरह विफल रही है।

कड़े कदमों की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने

  • पूरे प्रदेश में जल गुणवत्ता जांच
  • दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई
  • और इंदौर महापौर के इस्तीफे
    की मांग की।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में पानी की जांच कराएं, ताकि सच्चाई सामने आए और आगे किसी की जान न जाए।

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