बिना रास्ते का अस्पताल! उज्जैन में मरीजों की उम्मीदें दलदल में.
Hospital Without a Road! Patients’ Hopes Sinking in the Mud in Ujjain.
Special Correspondent, Ujjain, MP Samwad.
MP संवाद,उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के कजलाना गांव में 16 करोड़ रुपये की लागत से बना दो मंजिला अस्पताल आज तक चालू नहीं हो पाया है — वजह? अस्पताल तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं बनाई गई!
सरकार ने यह अस्पताल करीब दो साल पहले 175 गांवों के मरीजों की सुविधा के लिए बनवाया था, लेकिन बिना एप्रोच रोड के अस्पताल बनाना, PWD और स्वास्थ्य विभाग की बेतहाशा लापरवाही को उजागर करता है। अब हाल ये है कि अस्पताल शुरू होने से पहले ही जर्जर होने लगा है — दीवारों का रंग उड़ने लगा है, खिड़कियां और दरवाजे सड़ने लगे हैं।
खेत में बना अस्पताल, पीछे से बननी थी सड़क
अस्पताल को एक खुले खेत में बिना पक्की योजना के बना दिया गया। पहले इसके पीछे से एप्रोच रोड बनाने की योजना थी, जो कभी पूरी नहीं हो पाई। चार महीने पहले शासन ने 58 लाख रुपये की लागत से रोड के लिए स्वीकृति तो दे दी, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।
शनिवार को निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को कीचड़ के कारण अस्पताल तक पहुंचने में भी असमर्थता झेलनी पड़ी — यह इस परियोजना की विफलता की जीवंत तस्वीर थी।
CMHO ने मानी गलती, PWD ने दिया बहाना
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक पटेल ने स्वीकारा कि अस्पताल करीब दो साल पहले बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन सड़क नहीं बनने से चालू नहीं हो पाया।
वहीं PWD एसडीओ साक्षी तंत्वे ने बताया कि सड़क के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन बारिश की वजह से काम में देरी हो रही है।
ग्रामीण बोले: ‘न इलाज मिला, न जवाब!’
कजलाना, मालीखेड़ा, टोड़ी और भाटपचलाना जैसे गांवों के लोगों को उम्मीद थी कि अब इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन अब दो साल बाद भी वे सिर्फ बंद अस्पताल और टूटी उम्मीदें देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है:
“सरकार ने अस्पताल तो बना दिया, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता ही छोड़ दिया! हमें अब भी बड़नगर स्वास्थ्य केंद्र की दूरी नापनी पड़ती है।”