सिंहस्थ पर सियासी संग्राम: किसान, RSS संगठन और विधायक तक मोर्चे पर.
Political Battle over Simhastha: Farmers, RSS Organization, and MLA Join the Frontline.
Special Correspondent, Ujjain, MP Samwad.
Farmers in Ujjain have launched a strong protest against permanent land acquisition for Simhastha 2028. With 17 villages opposing land pooling, RSS-affiliated Bharatiya Kisan Sangh and even a BJP MLA have joined the movement. The clash highlights rising tensions between the government’s development plans and farmers’ livelihood concerns.
MP संवाद, उज्जैन, मध्य प्रदेश में साल 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन सरकार की इस तैयारी ने किसानों की नींद उड़ा दी है। सरकार सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण के लिए 2378 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की योजना बना रही है। इसके खिलाफ 17 गांवों के किसान सड़क पर उतर चुके हैं।
RSS से जुड़े संगठन ने खोला मोर्चा
इस बीच, किसानों की आवाज़ को अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) का साथ मिल गया है। सोमवार को पूरे प्रदेश में BKS ने लैंड पुलिंग एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा।
मंगलवार को उज्जैन में 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों की रैली निकाली गई। रैली में किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने भाग लिया और आगामी आंदोलन की रूपरेखा घोषित की।
बीजेपी विधायक ने भी जताई आपत्ति
दिलचस्प बात यह है कि विरोध की आवाज़ भाजपा के भीतर से भी उठ रही है। आलोट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने विधानसभा सत्र में सरकार पर सवाल दागे। उन्होंने कहा –
“सिंहस्थ के नाम पर किसानों की जमीन पहले केवल 3-6 महीनों के लिए ली जाती थी, अब स्थायी कब्ज़ा किया जा रहा है। यह कॉलोनाइज़र और भू-माफिया का षड्यंत्र है।”
मालवीय ने यहां तक कहा कि – “सिंहस्थ की आत्मा तंबुओं में है, कांक्रीट के भवनों में नहीं।”
सरकार का तर्क बनाम किसानों का गुस्सा
सरकार का कहना है कि स्थायी निर्माण से हर 12 साल में होने वाले अस्थायी खर्चों से बचत होगी और सुविधाएं बेहतर होंगी। लेकिन किसानों का आरोप है कि 1,806 किसानों की जमीन छीनने की साजिश की जा रही है। उनका कहना है कि यह योजना उनके जीविका और अस्तित्व पर सीधा हमला है।
आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने साफ कहा है कि वे अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। उनका आरोप है कि सरकार अध्यात्म और विकास की आड़ में भू-माफियाओं को फायदा पहुंचा रही है। अब BKS और विपक्ष के समर्थन के बाद यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।