बीमार पोता, खड़ी दादी और लाचार व्यवस्था!
Sick Grandson, Standing Grandma, and a Helpless System!
Harishankar Parashar, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
In a shocking incident at Satna District Hospital, a 72-year-old grandmother had to hold a drip bottle for her injured grandson due to lack of a stand. This highlights the grim reality of healthcare services in Madhya Pradesh and raises serious questions on the government’s tall healthcare claims.
MP संवाद, सतना, 17 अगस्त 2025: मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपने घायल पोते की ड्रिप बोतल खुद हाथ में पकड़कर आधे घंटे तक खड़ा रहना पड़ा, क्योंकि अस्पताल में एक भी ड्रिप स्टैंड उपलब्ध नहीं था।
घायल युवक को नहीं मिली बेसिक मेडिकल सपोर्ट:
घटना के अनुसार, 25 वर्षीय युवक को सड़क हादसे के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान जब उसे ड्रिप दी जा रही थी, तो स्टैंड की अनुपलब्धता के चलते, उसकी बुजुर्ग दादी को ही बोतल पकड़नी पड़ी। परिजनों ने बताया कि कई बार स्टाफ से गुहार लगाने के बावजूद मदद नहीं मिली।
परिजनों और मरीजों में गुस्सा:
मरीज के परिवारजनों और अन्य लोगों ने अस्पताल की इस हालत पर गहरी नाराजगी जताई। एक व्यक्ति ने कहा, “अगर एक साधारण ड्रिप स्टैंड नहीं है, तो ICU या ऑपरेशन थियेटर की हालत क्या होगी?”
पहले भी रही है अस्पताल विवादों में:
यह कोई पहली बार नहीं है जब सतना जिला अस्पताल में अव्यवस्था उजागर हुई हो। पहले भी यहाँ पर दवाइयों की कमी, बेड की अनुपलब्धता और स्टाफ की लापरवाही को लेकर खबरें सामने आती रही हैं।
प्रशासन चुप, कर्मचारी बोले—संसाधनों की भारी कमी:
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस मामले में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। परंतु एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अस्पताल में संसाधनों और स्टाफ—दोनों की भारी कमी है।
सामाजिक कार्यकर्ता का आरोप—‘स्वास्थ्य व्यवस्था खुद बीमार है’:
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पांडे ने कहा, “भाजपा सरकार सिर्फ घोषणाओं में व्यस्त है। जिला अस्पतालों की हालत देख लगता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में है।”
क्या कभी सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था?
यह घटना एक बार फिर सरकार और प्रशासन की कथित संवेदनशीलता पर सवालिया निशान खड़े करती है। क्या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं कभी वास्तव में जनता के लिए सुगम और भरोसेमंद बन पाएंगी?