आस्था बनाम अव्यवस्था: संदूक गौशाला से उठती बदइंतजामी की बदबू.
संदूक गौशाला की अव्यवस्थाएं बनीं नर्मदा परिक्रमा वासियों की परेशानी
Faith vs Mismanagement: The Stench of Disorder Rising from Sandook Gaushala.
Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur, MP Samwad News.
MP संवाद, नरसिंहपुर, नर्मदा परिक्रमा जैसे पवित्र धार्मिक मार्ग पर यदि श्रद्धालुओं को भक्ति के बजाय बदबू, अव्यवस्था और मृत गौवंश के दर्शन हों, तो इसे प्रशासनिक विफलता नहीं तो और क्या कहा जाए?
जनपद पंचायत साईंखेड़ा के ग्राम पंचायत संदूक में संचालित गौशाला आज गौसंरक्षण नहीं, बल्कि गौवंश की मौत और सरकारी लापरवाही की प्रतीक बनती जा रही है। आरोप है कि यहां लगातार गौवंश की मौत हो रही है और नियमों को ताक पर रखकर मृत पशुओं को धर्मशाला और आश्रम के पास खुले में फेंक दिया जाता है।
स्थिति यह है कि नर्मदा परिक्रमा पर आने वाले श्रद्धालु दुर्गंध, आवारा कुत्तों और बिखरे अवशेषों के बीच रात गुजारने को मजबूर हैं। यह न सिर्फ धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और पशु क्रूरता कानूनों का खुला उल्लंघन भी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतें गौशाला संचालक, ग्राम सरपंच और थाना प्रभारी तक पहुंच चुकी हैं, फिर भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जनआक्रोश का इंतजार कर रहा है?
इससे भी ज्यादा गंभीर तथ्य यह है कि पूर्व में भी इसी गौशाला में अनियमितताओं के चलते संचालक बदले गए थे, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे साफ है कि समस्या सिर्फ संचालन की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशालाओं के नाम पर शासन से मिलने वाली राशि सिर्फ फाइलों और बिलों तक सीमित है। जमीनी हकीकत बदहाली, मौत और बदइंतजामी की कहानी बयां कर रही है।
अब नर्मदा परिक्रमा वासियों और धर्मशाला प्रबंधन ने जिला कलेक्टर नरसिंहपुर से सीधी मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए और मृत गौवंश के सम्मानजनक निपटान के सख्त निर्देश जारी हों।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या प्रशासन जागेगा या फिर गौवंश और श्रद्धालु यूं ही सिस्टम की बलि चढ़ते रहेंगे?