घर नहीं, ग़रीबी मिली! पीएम आवास योजना भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन गई?
PM Awas Yojana: Dreams of homes shattered as corruption eclipses hope in Madhya Pradesh.
No home, only hardship! Has the PM Housing Scheme turned into a laboratory of corruption?
Source NDTV, Edited by Richa Tiwari, Bhopal. MP Samwad.
MP संवाद, भोपाल, प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के घर का सपना पूरा करने के लिए शुरू हुई थी, लेकिन मध्यप्रदेश में यह योजना लाभ से ज़्यादा लूट का जरिया बनकर सामने आ रही है। कटनी, भोपाल और सतना—तीनों जिलों की कहानी लगभग एक जैसी है। फाइलों में विकास मोटा दिखता है, लेकिन ज़मीन पर गरीबों के हिस्से में सिर्फ इंतजार, पीड़ा और ठगा जाना बचा है।
कटनी के झिंझरी प्रोजेक्ट को ही ले लीजिए। 105 करोड़ की यह परियोजना भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुकी है। करोड़ों की जमीन सस्ते दामों पर निपटाई गई, ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और हितग्राही पिछले सात वर्षों से सिर्फ “उम्मीद” का बोझ ढो रहे हैं। न घर मिला, न समय पर काम पूरा हुआ और न ही किसी ने इनके दर्द की सुध ली।
भोपाल में स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। यहां पीएम आवास योजना के लाभार्थी दोहरी मार झेल रहे हैं। कोई EMI और किराया दोनों भरने की मजबूरी में नौकरी छोड़कर रिक्शा चलाने पर मजबूर है, तो कोई कर्ज के बोझ तले टूट गया है। सरकार ने वादे किए, सिस्टम ने फाइलें चलाईं, लेकिन परिणाम आज भी अधूरा है।
सतना में तो स्थिति और हैरान करने वाली है। जहां असली गरीबों को घर नहीं मिला, वहीं प्रभावशाली लोगों, अपात्रों और जुगाड़बाजों ने योजना को लूट लिया। मृतकों के नाम पर स्वीकृत मकान, दस्तावेजों में हेरफेर, रिश्वत मांगने के आरोप—सबकुछ खुलेआम हुआ, लेकिन सिस्टम खामोश रहा।
अब सवाल बड़ा है—क्या ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ सिर्फ चुनावी नारा रह गया है? क्या यह योजना गरीबों के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम के मुनाफे का नया मॉडल बन चुकी है?
एक बात तो साफ है—सरकारी कागजों में विकास चमकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि गरीब आज भी अपने घर की चौखट का इंतजार कर रहा है… और उसका सपना सरकारी फाइलों में कैद होकर रह गया है।
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