ढाई लाख की ‘उम्मीद’ कैद! दबंगों के कब्जे में विधवा की भैंसें, प्रशासन देखता रहा
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। देवेंद्रनगर तहसील के कोढनपुरवा गांव की एक बेसहारा बुजुर्ग विधवा अपनी दो भैंसों को वापस पाने के लिए लगातार गुहार लगा रही है, लेकिन गाँव के रसूखदार दबंगों के आगे प्रशासन घुटने टेकता नजर आ रहा है।
बुजुर्ग पीड़िता सुनीता कुशवाहा ने बताया कि उसकी दो भैसें ही उसकी जीवनरेखा थीं। इन्हीं के जरिए वह अपनी रोज़ी-रोटी चलाती थी। आरोप है कि गांव के दबंगों ने उसकी भैंसों को खेतों से पकड़कर अपने कब्जे में ले लिया और अब उन्हें वापस करने से साफ इनकार कर रहे हैं। इन भैसों की कीमत करीब ढाई लाख रुपये बताई गई है। पीड़िता ने न केवल शिकायत दर्ज कराई बल्कि भैंसों की पहचान भी कर ली है, जो आरोपियों के पास बंधी हुई हैं।
नामजद शिकायत के बाद भी पुलिस खामोश
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महिला ने स्पष्ट नामजद शिकायत दर्ज कर दी, भैंसों की पहचान कर ली, तब भी पुलिस और स्थानीय प्रशासन खामोश क्यों है? क्या कानून केवल कमजोरों के खिलाफ ही सक्रिय होता है? क्या गरीब विधवा होना अपराध है?
पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन मिला, न्याय नहीं। थक-हारकर वह कलेक्टर कार्यालय पहुंची और न्याय की गुहार लगाई।
गरीब न्याय के लिए तरस रही, दबंग बेखौफ
यह प्रकरण केवल पशु चोरी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का भी कड़वा सच है। सवाल यह भी उठता है कि क्या पन्ना जिले में कानून से ऊपर दबंग हैं? क्या एक गरीब विधवा का हक दिलाने की ताकत प्रशासन में नहीं बची? यदि नामजद शिकायत और स्पष्ट साक्ष्य के बाद भी कार्रवाई न हो, तो आम जनता न्याय के लिए किसके पास जाए?
अब जिले की जनता और पीड़िता दोनों की निगाहें प्रशासन पर टिक गई हैं। देखना होगा कि पन्ना प्रशासन गरीब विधवा को न्याय दिलाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।