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कलेक्टर के आदेशों की हो रही अवहेलना: बोरदेही ,पंचायती राज आमला उतरा हिटलर शाही पर

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Collector’s orders are being disobeyed: Bordehi, Panchayati Raj Amla landed on Hitler Shahi

डॉ जाकिर शेख

अजब पंचायती राज आमला की गजब गाथा, चुके ग्राम पंचयात बोरदेही दुकानों के मामले मे बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने 25 दुकानदार, 5 सरपचं के साथ ही 3 सचिव, एक सहायक सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे, परतु 1 माह से अधिक समय हो जाने के पश्चात भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

राजनैतिक दबाव के कारण जिला पंचयात मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं आमला जनपद पंचयात मुख्य कार्यपालन अधिकारी शासकीय दुकानों के मामले को रफा दफा करने मे लगे हुए दिखाई दे रहे, वही पत्रकारों से दूरी बनाते हुए, सेल फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी नहीं दे पा रहे, पंचायती राज के आका

दिन-ब-दिन सीएम हेल्पलाइन का महत्व खत्म होता दिखाई दे रहा है… चुके 181 पर कुछ और ही दर्शाया जा रहा, पंचायती राज के किसी और मामले का निराकरण जनपद पंचायत आमला मैं बैठे आका के चलते या मिली भगत से सीएम हेल्पलाइन शिकायतकर्ता से बिना किसी जानकारी के कर दी गई बंद

आमला / उलझ रही है, एय जिंदगी तू , फिर क्यों न तुझे चासनी में डुबोकर मजा ले ही लिया जाए… प्राय-प्राय देड माह बीतने को आया, जिला कलेक्टर के आदेशों का पालन हो रहा है, न हीं कोई पंचायती राज की ओर से बडी कार्यवाही… चुके जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं बैतूल कलेक्टर कि कहीं न कहीं आमने-सामने की जुगलबंदी दिखाई दे रही… चूकी जिले में बैठे आकाओ द्वारा अपने-अपने गरिमामय पद का दुरुपयोग करने के कारण गरीबो की रोजी रोटी पे बढ़ रहा बड़ा संकट, पंचायती राज के देन के चलते पूर्व सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक ने काटी है, बड़े पैमाने पर चांदी, आमला में बैठे आका है मौन…शिकायत
ग्राम पंचयात बोरदेही दुकानों मे बडी गड़बड़ी की गई है, तत्कालीन सरपंच, सचिव के चाह ने वालों को एक नहीं, कई-कई दुकाने आवंटित की गई, कई दुकानदारों के नाम पर एक से अधिक दुकाने पाई गई, तो कई दुकानदारों ने ग्राम पंचायत की दुकानों की बनावाट व्यवस्था को ही बदल कर राख दिया, कई दुकानों को तोड़कर एक बड़ी चाल में परिवर्तित कर दिया गया है. कुछ दुकानों को आपस में क्रय-विक्रय का खेल किया गया है… सर्वाधिक दुकान किराए पर चला कर मोटी रकम वसूल रहे हैं… जिससे ग्राम पंचायत को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा, पंचयात की दुकानों मे एक व्यक्ति के नाम पे दो दुकाने भी पाई गई है,
दुकानदारों के द्वारा कई दुकानों की दीवारों को तोड़ कर एक दुकान से कई दुकानें बनाई गई. परंतु इस मामले मे बैतूल कलेक्टर ने करवाई तो की है… किंतु परिपूर्ण तरीके से दुकानों पर कार्यवाही नहीं हो सकी, 32 लोगों को इस मामले में कारण बताओं नोटिस जारी किया गया था.. 32 लोगों के बयान लेने के पश्चात मामले को तरीके से विराम दिया गया, ऐसा प्रतीत होने लगा है… सूत्रों का कहना है कि राजनीति षड्यंत्र कहो या सियासत का दबाव, “अधिकारियों मे डर का माहौल व्याप्त है” कहीं न कहीं जनप्रतिनिधि द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त सरपच, सचिव के सर पर आ-का-ओ के हाथ के चलते अधिकारियों पर दबाव के कारण इस मामले को कचरे के ढेर में तब्दील कर शासकीय दुकानों के मामले को विराम देने की नाकाम कोशिश की जा रही…

सवाल तो यह है, कि

नवागत कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने इस मामले को संज्ञान में लिया था, तो इस मामले में किसी सरपंच, सचिव एवं दुकानदारो पर दंडात्मक कार्रवाई आखिर क्यों नहीं की गई… मामले मे ऐसा क्या मोड आ गया कि शिकायतकर्ता से मौखिक मुलाकात तो दूर सेल फोन के माध्यम से मुलाकात करने पर भी अधिकारियों को डर लगने लगा है… अधिकारी भ्रष्टाचारियों को बचाने में लगे, या फिर जनप्रतिनिधि किसी विशेष पार्टी या डबल इंजन का डर अधिकारियों मैं खास तौर से दिखाई दे रहा…भ्रष्टाचारी सरपंच, सचिव की मिली भगत के कारण एक ही व्यक्ति को दो दुकान आवंटित तो कर दी गई, परंतु जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी की कार्रवाई पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं….
जिला पंचयात मुख्य कार्यपालन अधिकारी मिडिया से अब क्यू दुरी बानने लगे, बोरदेही दुकानों के मामले मे जानकारी के लिए पत्रकारों के फोन तक उठाए नहीं जा रहे, ऐसा लग रहा है की राजनीति का डंडा अब जिला अधिकारी को डराने में लगा हुआ है….

बोरदेही दुकाने के मामले को रफा दफा करने मे लगे, जिला पंचयात वही जनपद पंचयात के बड़े अधिकारी
चुके सीएम हेल्पलाइन नंबर 24506954 दिनांक 30/09/2023को शिकायत की गई थी, परतु जनपद पंचयात के अधिकारी के द्वारा शिकायतकर्ता को गुमराह किया गया, और इस शिकायत पे पुरना मामला जो की हाईकोर्ट मे विचाराधीन स्थिति में पड़ा है, परंतु अधिकारी इस मामले में पुरना निराकरण दर्शाकर मामला को शिकायतकर्ता से बिना पूछे की गई सीएम हेल्पलाइन भी बंद

जहाँ हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीस विश्वास की गारंटी देते हैं, किंतु उनके अधिकारीयो द्वारा किस प्रकार से शिकायतकर्ता को गुमराह कर मामले को रफा दफा करने मे लगे हुए है

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