गिरफ्तारी के नए कानून—हर नागरिक को जानना जरूरी.
New Arrest Laws—Every Citizen Must Know.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल/कटनी। अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के आदेश के पालन में सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों एवं संबंधित इकाइयों को एक महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है।
यह परिपत्र 6 नवंबर 2025 को पारित आदेश (महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य बनाम आपराधिक अपील प्रकरण) के अनुपालन में जारी किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
गिरफ्तारी के कारण बताना मौलिक अधिकार
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
इस अधिकार की रक्षा के लिए पुलिस को अब निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा।
अब लिखित में बताने होंगे कारण
जारी परिपत्र के अनुसार, पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी के स्पष्ट और ठोस कारण लिखित रूप में देना अनिवार्य किया गया है।
सिर्फ मौखिक जानकारी देना अब पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
स्थानीय भाषा में देना होगा विवरण
निर्देशों के अनुसार, गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में लिखे जाने चाहिए जिसे गिरफ्तार व्यक्ति आसानी से समझ सके।
यानी स्थानीय भाषा में जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
समय सीमा भी तय
गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी:
- या तो गिरफ्तारी के समय दी जाएगी
- या फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले उपलब्ध करानी होगी
साथ ही इसकी जानकारी गिरफ्तारी पंचनामा या संबंधित दस्तावेजों में दर्ज करना भी जरूरी होगा।
BNSS 2023 का भी हवाला
इस परिपत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है, जो गिरफ्तारी प्रक्रिया को और स्पष्ट करता है।
उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो:
- गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है
- संबंधित अधिकारी पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है
- विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है
- आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार मिल सकता है
पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों से इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं।
इसका उद्देश्य विधिसम्मत कार्रवाई के साथ-साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
बड़ा सवाल: क्या जमीनी स्तर पर होगा पालन?
हालांकि आदेश स्पष्ट हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नियमों का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन होगा या फिर यह केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा?