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नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिल सकता है 4 और विधायको का साथ, जम्मू-कश्मीर में अपने दम पर बना सकती है सरकार

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श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए निर्वाचित सात निर्दलीय उम्मीदवारों में से तीन नेशनल कान्फ्रेंस में अपनी घर वापसी के लिए तैयार हैं। इनके अलावा कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले एक विजयी उम्मीदवार भी हाथ के बजाय हल (नेकां का चुनाव चिन्ह) थामने के मूड में हैं। वहीं, कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार को उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है। चुनाव परिणाम में सात निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। इनमें से तीन नेशनल कान्फ्रेंस के बागी हैं, जिन्होंने टिकट न मिलने पर पार्टी से नाता तोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता है। राजौरी के थन्नामंडी सीट पर भाजपा के मोहम्मद इकबाल मलिक को 6179 वोटों के अंतर से हराने वाले पूर्व जज मुजफ्फर इकबाल खान का संबंध नेकां से रहा है।

जज की नौकरी छोड़ थामा था नेकां का दामन
मुजफ्फर खान को नेकां ने उम्मीदवार बनाने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन समझौते में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। पूर्व जज के पिता असलम खान 2002 में राजौरी से विधायक चुने गए थे। 2019 में मुजफ्फर खान ने जज की नौकरी छोड़कर नेकां का दामन थाम लिया था, लेकिन टिकट न मिलने पर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर पड़े और जीत गए। अब वह फिर से नेकां में शामिल हो जाएंगे। थन्नामंडी से कांग्रेस के मोहम्मद शब्बीर खान ने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और हार गए।

ये विधायक कर सकते हैं घर वापसी
किश्तवाड़ जिले के इंद्रवाल से निर्दलीय चुनाव जीते प्यारे लाल शर्मा भी नेकां के सदस्य रहे हैं। नेकां-कांग्रेस गठजोड़ होने के कारण इंद्रवाल से गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के मोहम्मद जफरुल्लाह ने चुनाव लड़ा। अपना टिकट कटने से नाराज प्यारे लाल शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। वहीं नेकां में वापस जाने का एलान कर चुके हैं। पुंछ के सुरनकोट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले चौधरी अकरम खान ने वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था।

कई निर्दवीय विधायक आ सकते हैं नेकां में
करीब चार वर्ष पहले वह जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी का हिस्सा बने थे और कुछ समय बाद उन्होंने उससे नाता तोड़ नेकां का दामन थाम लिया था। सुरनकोट सीट से कांग्रेस के पक्ष में उम्मीदवार न उतारने के नेकां नेतृत्व के फैसले से आहत होकर अकरम खान ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। उन्होंने गठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद शहनवाज चौधरी को 8851 वोटों के अंतर से हराया है। ये सभी निर्दलीय नेकां में लौटने को तैयार हैं। सभी नेकां नेतृत्व के साथ लगातार संवाद और संपर्क बनाए हुए हैं। इंद्रवाल से निर्वाचित प्यारे लाल शर्मा तो बुधवार को किश्तवाड़ से श्रीनगर के लिए रवाना हुए हैं। उनके गुरुवार को नेकां विधायक दल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

ये निर्दलीय भी हैं कतार में
जम्मू के छंब से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारांचद को हराने वाले निर्दलीय सतीश शर्मा (कांग्रेस के बागी) भी कथित तौर पर नेकां में शामिल होने के मूड में हैं। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी उनके साथ कथित तौर पर संपर्क किया है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व भी उन्हें मनाने का प्रयास कर रहा है। अलबत्ता, वह कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की गई अपनी उपेक्षा से आहत हैं और लौटने के मूड में नहीं हैं। सतीश शर्मा से जब इस बावत संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन बंद था। वहीं कठुआ जिले के बनी में भाजपा उम्मीदवार व पूर्व विधायक जीवन लाल को हराने वाले निर्दलीय डा. रामेश्वर सिंह भी नेकां में जाने का मन बना चुके हैं और वह भी अगले एक दो दिन में हल के निशान वाला लाल झंडा थाम लेंगे।

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