42 केंद्र तय, फिर भी खरीदी बंद! प्रशासनिक लापरवाही से किसान परेशान.
42 centers designated, yet procurement halted! Farmers troubled by administrative negligence.
Rajneesh, Special Correspondent, Narsinghpur, MP Samwad.
Despite 42 procurement centers being designated in Narsinghpur, moong purchasing hasn’t begun. Farmers are distressed due to WDRA license rules and continuous rainfall. The delay in procurement is pushing their produce towards spoilage, and they are demanding urgent relief from the government.
MP संवाद, नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी की प्रक्रिया दस्तावेज़ों में तो 7 जुलाई 2025 से शुरू हो चुकी है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे एकदम उलट है। किसानों से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से उपज खरीदी जानी है, जिसमें मूंग का समर्थन मूल्य 8682 रुपये और उड़द का मूल्य 7400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। लेकिन खरीदी अभी तक हकीकत में नहीं उतर सकी है।
केंद्र सरकार ने इस वर्ष खरीदी की जिम्मेदारी कृषि विभाग की एजेंसी NAFED और सहकारिता विभाग की एजेंसी NCCF के माध्यम से MARKFED को दी है, जिसके तहत मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इन संस्थाओं को वेयरहाउस, सर्वेयर और खरीद केंद्रों की व्यवस्था करनी थी।
42 केंद्र तय, फिर भी खरीद नहीं शुरू
नरसिंहपुर जिले में जिला उपार्जन समिति द्वारा 7 जुलाई को 42 उपार्जन केंद्र और भंडारण स्थल तय कर दिए गए थे। किसानों ने स्लॉट बुक कर अपने-अपने नजदीकी केंद्रों पर मूंग की फसल पहुँचाना भी शुरू कर दिया। लेकिन 10 जुलाई से अब तक खरीदी शुरू नहीं हो सकी। इस बीच हो रही लगातार बारिश ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। खेतों में बोई गई सोयाबीन की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है और अब खुले में रखी मूंग भी भीगने लगी है।
WDRA लाइसेंस बना सबसे बड़ी बाधा
MARKFED के जिला प्रबंधक मनीष चौरसिया और उप संचालक कृषि मोरिश नाथ दोनों का कहना है कि राज्य शासन ने 8 जुलाई को आदेश जारी कर WDRA (वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी) से लाइसेंस प्राप्त वेयरहाउस को ही खरीदी के लिए पात्र घोषित किया है। नतीजतन, पहले से तय अधिकांश केंद्र अयोग्य हो गए।
हालांकि, प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए 14 नए केंद्रों की पहचान कर खरीदी प्रारंभ करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, WDRA लाइसेंस की अनिवार्यता पर राहत या अस्थायी छूट के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया है, जिससे सोमवार से खरीदी सुचारू रूप से शुरू हो सके।
खरीदी केंद्रों के चयन में अनियमितताएं भी उजागर
जिले में खरीदी केंद्रों और वेयरहाउसों के चयन में भारी अनियमितताओं की भी खबरें हैं। सूत्रों के अनुसार, छुटभैया नेताओं और दलालों ने विभागीय अधिकारियों पर दबाव डालकर अपने लोगों के नाम पर वेयरहाउस और केंद्र स्वीकृत करवा लिए। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
