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मोहन सरकार ने खरगोन जिले में मिर्च से जुड़े और उद्योग लगाने का निर्णय लिया

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 खरगोन

निमाड़ का खरगोन जिला सिर्फ कपास के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां की मिर्च भी देशभर में खासी पहचानी जाती है। मिर्च से जुड़े लगभग सौ से ज्यादा उद्योग फिलहाल जिले में रोजगार के साधन मुहैया करवा रहे हैं। अब इस कारोबार को विदेश तक पहुंचाने की योजना औद्योगिक विकास निगम और प्रदेश सरकार बना रही है। एक जिला एक उत्पाद के तहत जिले में आगामी समय में मिर्च से जुड़े 200 उद्योग लगाए जाएंगे।

यह है मध्‍य प्रदेश सरकार की योजना

मध्‍य प्रदेश सरकार की योजना है कि जिले में मिर्च की फसल से लेकर उसकी उपज का विदेशों तक कारोबार किया जाए। फिलहाल कई किसान समूह के माध्यम से विदेशों में खड़ी मिर्च व पाउडर भेजते हैं। अब नए उद्योगों के बाद विदेश निर्यात का नई राह खुलेंगी और क्षेत्रवासियों को स्वरोजगार के साथ ही आर्थिकी भी बेहतर होगी। निमाड़ में खरगोन में ही 45 हजार हेक्टेयर से ज्यादा में मिर्च की खेती होती है।

कुछ प्रमुख बातें

  1.     मप्र के खरगोन जिले की बेड़िया मिर्च मंडी पीएम नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन में शामिल है।
  2.     बेहतर स्वाद के कारण बेड़िया मिर्च की मांग ज्यादा है।
  3.     खेती में कम लागत, कम समय में मिर्च की फसल (मिर्च तीन से चार बार आना) तैयार होती है।
  4.     नकद राशि के कारण मिर्च की खेती ज्यादा होने लगी है।
  5.     सरकार ने भी मिर्च खेती और उसके कारोबार को बढ़ाने का फैसला किया है।
  6.     सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को दिया जा रहा प्रोत्‍साहन।
  7.     प्रधानमंत्री रोजगार योजना से जिले के युवा खुद का कारोबार स्थापित कर रहे हैं।

औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ

किसान मिर्च की खेती से औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ प्राप्त करता है। जिले में साढ़े तीन लाख किसानों में से 70 हजार किसान मिर्च की खेती करते हैं। जिले के डालकी के किसान बालकृष्ण पाटीदार ने टेराग्लेब समूह बनाया है। इसमें 300 किसानों के साथ 600 एकड़ जमीन में मिर्च की खेती की जाती है। विदेशों में रसायनमुक्त मिर्ची भेजी जाती है।

किसान यूरोप सहित चाइना को मिर्च सप्लाय

मिट्टी के सेंपल्स केरला की एविटी लेब में जांच कराई। इसमें रसायन प्रोपिनोफास, ट्रेजोफास, क्लोरोपारीफास, और मोनोक्रोटफास नहीं मिला। यह रसायन अमेरिका सहित यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित है। किसान यूरोप सहित चाइना को मिर्च सप्लाय करते हैं। वह मुंबई से पोर्ट के माध्यम से विदेशों तक मिर्च भेजते हैं। बालकृष्ण बताते हैं कि एक एकड़ पर 40 हजार रुपये का मुनाफा होता है। पिछले साल 55 मीट्रिक टन मिर्च विदेश भेजी थी। कंपनी का टर्नओवर पांच करोड़ रुपए हैं।

पांच साल ऐसा रहा रकबा और उत्पादन

उद्यानिकी विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिले में पिछले पांच साल में मिर्च का रकबा व उत्पादन बढ़ा है।
वर्ष              रकबा        उत्‍पादन

2018-19     25369     63423 मीट्रिक टन
2019-20     23280     81480 मीट्रिक टन
2020-21     49052     171682 मीट्रिक टन
2021-22     51350     179725 मीट्रिक टन
2022-23     46556     139668 मीट्रिक टन

2023-24 में 45000 से ज्यादा रकबा है।

    मिर्च की विदेशों तक मांग, 200 उद्योग लगेंगे

    जिले की मिर्च की मांग विदेशों तक है। एक जिला एक उत्पाद में मिर्च उत्पाद पर आधारित प्रधानमंत्री सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग स्थापना के जल्द ही 200 उद्योग लगेंगे। इससे प्रोत्साहन के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। मिर्च से जुड़े कई किसान व उद्योग लगाने वाले लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। यह उत्पाद जिले को एक नई पहचान देंगे।

    -कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर

 

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